‘Brahma Kumaris is for people of all faiths’ ​: Nepal Ambassador​

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Abu Road, March 29: The Brahma Kumaris are empowering people to lead a life of peace, and it will soon turn into a socio-spiritual revolution, Deep Kumar Upadhyay, Ambassador of Nepal to India, said here today.

He was speaking during the 80th anniversary celebrations of the institution at its Shantivan campus.

Bhimsen Das Pradhan, an MP from Nepal, said that Brahma Kumaris was not a religion but a secular fold that included people of all faiths, and it was giving light to the whole world. “Had it been a religion, it would have fragmented by now,” he said.

Recalling his experiences of serving the nation abroad, former Indian diplomat Ashok Kumar Attri said, “In whichever country we work, we try to present India in good light. Brahma Kumaris are the biggest ambassadors of our country because they represent our culture.”

He was impressed by the smooth management at the Brahma Kumaris campus. “Nobody is being told anything here; everything seems to be going on effortlessly,” he said.

Wajood Sajid, Editor-in-Chief, VNI, said that the Muslim greeting ‘assalam alekum’ was the translated version of Om Shanti and vice versa. He said the founder of Brahma Kumaris did a great job by handing over the administration to women because the universe is beautiful because of mothers and sisters.

Nawab Jafar Mir Abdullah, president, Imamia Educational Trust, said that the foundational pillars of Islam and the Brahma Kumaris were the same – both believed in the oneness of God.

Rajiv Nishaana, Group Editor, Samachar Varta, urged the Brahma Kumaris to initiate more workshops for journalists so that they could experience peace of mind, as it was a rarity in the profession.

Senior Rajyogi BK Surya said if India combined its political and spiritual powers, it could become a lighthouse for the rest of the world. “We are citizens of a great country. Let us take it back to its original glory,” he said.

BK Shukla, National Coordinator, BK Security Services Wing, said the three things essential to bring about a change in the self were knowledge, will power and the art of transformation. Faith in the self and in God formed the foundation of a good life, she said.

Dr. Savita, Coordinator, BK Women’s Wing, said that spirituality gave us a mirror in which we could see ourselves and our shortcomings, and Rajyoga meditation was the means to change one’s thinking.

ABR 29 march morning news.pdf

Hindi News:

जीवन जीने की कला का आंदोलन है ब्रह्माकुमारीज : दीप कुमार उपाध्याय

– ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं से भारत में नेपाल के राजदूत हुए अभिभूत
– 80वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों में कई नामी हस्तियों ने रखे विचार
– शिक्षाविद, धर्मगुरुओं ने भी बहाई चिंतनधारा

आबूरोड सिरोही, (राजस्थान) 29 मार्च। ‘ब्रह्माकुमारीज पूरे विश्व के लोगों को शांति और शक्ति के साथ जीवन जीने की कला सिखा रही है। यह अलौकिक और अद्भुत कार्य है। संस्था की विपरीत परिस्थितियों में स्थितप्रज्ञ होने और मन को स्थित रखने की सीख स्वस्थ और सफल जीवन का आधार है। इस सामाजिक आंदोलन को उत्तरोत्तर समर्थन मिल रहा है। शीघ्र ही यह विश्वभर में जीवन जीने का आंदोलन बन जाएगा।

यह उद्गार भारत में नेपाल के राजदूत दीपकुमार उपाध्याय ने ब्रह्माकुमारीज की 80वीं वर्षगांठ पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन के चौथे दिन बुधवार को व्यक्त किए। संस्थान के प्रति बार-बार कृतज्ञता जताते हुए उन्होंने कहा कि शांति की स्थापना पीडि़त मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। विश्व के सभी धार्मिक-सामाजिक संगठनों पर अगुंली उठती रही है, मगर ब्रह्माकुमारीज एक ऐसा संगठन है जिस पर कभी कोई अगुंली नहीं उठी। यह एक ऐसा मत है जिसमें न कोई छोटा है, न बड़ा। भारत-नेपाल के बीच संस्कृति व सभ्यता का संबंध है।

नेपाल के सांसद भीमसेनदास प्रधान ने कहा कि यह एकमात्र ऐसा संगठन है जहां धर्मनिरपेक्ष के आधार पर चरित्र का निर्माण किया जाता है। यहां से जुडऩे के बाद जीवन में सुख-शांति आ जाती है। यह विश्व शांति और आत्म शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। संस्था बहुत ही अच्छा कार्य कर रही है।

पत्रकार भी लें राजयोग का प्रशिक्षण: राजीव निशाना

समाचारवार्ता के गु्रप एडिटर राजीव निशाना ने कहा कि आज शांति की सबसे ज्यादा जरूरत पत्रकारिता जगत को है। पत्रकारों और पत्रकारिता का कोर्स कर रहे विद्यार्थियों को राजयोग का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे खुद जीवन जीने की कला सीख सकें और नकारात्मक विचारों से परहेज करें। पत्रकारिता में आ गई बुराइयों से खुद दूर रहें और समाज को भी सकारात्मक खबरों से प्रशिक्षित करें। यहां देशभर के सभी पत्रकारों को एक बार जरूर आना चाहिए।

अस्सलाम वालेकुम् और ओम शांति एक ही शब्द

वीएनआई के मुख्य संपादक वदूद साजिद ने कहा कि ‘अस्सलाम वालेकुम् और ओम शांतिÓ एक ही शब्द है। शांति..शांति और शांति…। साजिद ने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब कहते थे, पूरी कायनात हमारी है… तो ब्रह्माकुमारीज अपने शांति व राजयोग के मंंत्र से इसी को साकार कर रही है। यहां सभी सुप्रीम गॉड के बच्चे हैं। पूरे विश्व में सेवाएं दे रहे हैं। एक और दृष्टांत में कहा कि मोहम्मद साहब की बेटी फातिमा जब आती थीं तो वे उठकर अपना बिछौना उन्हें दे देते थे। इसी तरह यहां पर भी नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया जा रहा है। जो काम करोड़ों लोगों को करना था, वो संस्था ने अपने दम पर कर दिखाया है। भारत जैसा सुपर स्पिीरिचुअल पावर कहीं नहीं, जहां ब्रह्माकुमारीज जैसा सामाजिक आंदोलन काम कर रहा है।

ब्रह्माकुमारीज माउण्ट आबू में जन्नत को देखा: नवाब जफर मीर अब्दुल्लाह

इमामिया एजुकेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष नवाब जफर मीर अब्दुल्लाह ने कहा कि हम लोग जन्नत, हेवन के बारे में कल्पना करते हैं लेकिन मैंने यहां ब्रह्माकुमारीज माउण्ट आबू में जन्नत को देखा है। यहां प्रत्येक व्यक्ति के चेहरे पर शांति, प्रेम, सहयोग की भावना और रौनक देखने को मिली। यहां से दुनिया में इंसानियत का पैगाम दिया जा रहा है। ब्रह्माकुमारीज के उसूल और इस्लाम के उसूलों में काफी समानता है। इस्लाम के पांच मुख्य सिद्धांत और ब्रह्माकुमारीज के कार्य में समानता दिखती है।

यहां परमात्मा का होता है दिव्य अवतरण: सूरज भाई

वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक राजयोगी सूरज भाई ने कहा कि इसी स्टेज पर परमात्मा का दिव्य अवतरण होता है। इससे चारों ओर शुभ व सकारात्मक बायब्रेशन की अनुभूति सभी को होती है। इस स्थान पर वही व्यक्ति आता है जिसके भाग्य में होता है। जो देवकुल की आत्माएं हैं और भाग्यवान आत्माएं हैं वही यहां पहुंचती हैं। राजनीति और आध्यात्म के जोड़ से ही भारत फिर से विश्व गुरु बनेगा। अपने चित्त, मन का आध्यात्मिकता से भरते चलें तो जीवन आनंदमय बन जाएगा।

साधना छोडऩे से जीवन में बढ़ी अशांति: रानी दीदी

बिहार की जोनल इंचार्ज राजयोगिनी बीके रानी बहिन ने कहा कि मैं 60 वर्षों से ब्रह्माकुमारीज में समर्पित हूं, लेकिन मुझे कभी भी जीवन में कठिनाई नहीं आई। बाबा शांति से जीवन चला रहा है। मनुष्य ने आज भौतिक साधनों का विकास किया है, लेकिन साधना छोड़ दी है। इससे अशांति फैल गई है। जीवन में सुख-शांति व खुशहाली राजयोग से ही संभव है।

स्वचिंतन ही परिवर्तन की कला: बीके शुक्ला बहिन

सिक्योरिटी सर्विस विंग की नेशनल को-ऑर्डिनेटर बीके शुक्ला बहिन ने कहा कि आध्यात्मिकता चेतना से ही श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण संभव है। ज्ञान प्रकाश, योग का विस्तार और कर्म में निखार हो तो जीवन सहज बन जाएगा। स्वचिंतन, परमात्म चिंतन व सद्गुण ही श्रेष्ठ जीवन का आधार हैं। ज्ञान, इच्छाशक्ति और परिवर्तन की कला से ही श्रेष्ठ जीवन बनेगा। हमें सदा ज्ञान नेत्र जागृत रखना चाहिए। इसके बिना शक्तियों का  संचार नहीं हो सकता है। ज्ञान, योग और पवित्रता के बल के बिना सकारात्मक चिंतन व संसार में परिवर्तन संभव नहीं है। स्वचिंतन ही परिवर्तन की कला है।

जीवन में देने का भाव भी रखें: डॉ. सविता

वुमन विंग की हैडक्वार्टर को-ऑर्डिनेटर बीके डॉ. सविता  बहिन ने कहा कि यदि आप सदा जीवन में लेते रहेंगे तो यह खारा हो जाएगा। इसलिए देने का भाव भी रखें। राजयोग से जीवन का परिवर्तन हो जाता है। राजयोग के माध्यम से ईष्र्या, क्रोध, नफरत, द्वेष, नकारात्मकता आदि से छुटकारा पाकर जीवन में परिवर्तन लाया जा सकता है।   आवश्यकता से अधिक जो हमारे पास है वह विष है। किसी की अच्छाई को अस्वीकार करना ईष्या है। वहीं उसे स्वीकार करना प्रेरणा है। जो जैसा है उसे स्वीकार करना प्रेम है, वहीं उसे अस्वीकार करना नफरत है। आध्यात्मिकता वह दर्पण है जिससे हम स्वयं में परिवर्तन लाते हैं।

स्वागत गीत से बांधा समां…

कार्यक्रम के शुभारंभ पर श्रीलंका से आई बालिका वी. खुशी ने श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन पर आकर्षक नृत्य पेश किया, जिसे देख हॉल ताडिय़ों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। चेन्नई के रामू महाराजपुरम ने स्वागत गीत जिन्हें ढूंढे थे हम दर-दर, वो भगवान आ पधारे हैं… की प्रस्तुति दी। वहीं श्रीरंगम भारत नाट्यालय त्रीचि की बालिकाओं ने स्वागत मयूर नृत्य की प्रस्तुति दी। अतिथियों का सम्मान संस्था के अतिरिक्त महासचिव बीके मृत्युंजय भाई ने स्मृति चिह्न एवं पुष्पगुच्छ एवं माला पहनाकर किया गया। संचालन जयपुर की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके चंद्रकला बहिन ने किया। गॉडलीवुड स्टूडियो के डायरेक्टर हरिलाल भाई ने सभी का आभार माना।

बाबा के जीवन पर नाटक का मंचन

इधर, महोत्सव के तहत मंगलवार देर रात डायमंड हॉल में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक आकर्षक प्रस्तुति दी। मुंबई से आए कलाकारों ने संस्थान के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्माबाबा की जीवनी पर नाटक का मंचन किया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों ने जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। संस्थान की स्थापना के आदि समय से लेकर अब तक की विभिन्न गतिविधियों को नाटक के  जरिए प्रदर्शित किया गया। इसमें 70 से अधिक कलाकारों ने संस्था के शुरू से लेकर अब तक की 80 वर्ष की यात्रा और इस दौरान आईं विभिन्न परिस्थितियों, उपलब्धियों को प्रदर्शित किया।

फोटो केप्शन 

२९एबीआर०१आबूरोड। ब्रह्माकुमारी संगठन की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महासम्मेलन को संबोधित करते भारत में नेपाल के राजदूत दीपकुमार उपाध्याय।

२९एबीआर०२आबूरोड। महासम्मेलन में उपस्थित सहभागी।

२९एबीआर०३,४,५ आबूरोड। नाटक मंचन में प्रस्तुतियां देते कलाकार।