Enlightened Media for Building a Better World

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Media generally means as an instrument, a tool or a medium. Journalists use this medium for communicating information and knowledge, to inspire and to educate people.  Therefore, when we address it as illumined or enlightened media, it directly refers to journalism or journalists but not merely to hardware instruments.  The act of communicating information, thoughts and their analysis or interpretation is journalism, which is transmitted to the public through media. In this context, media means integration of both instruments and journalists, and both come under the purview of journalism.

We all want a better society or a society based on human values; and we make attempts for this. Both the government and people think, consider and do their effort to satisfy this desire of the people.  In the last few years, there has emerged a difference in this effort.  People gradually started expecting everything from the government. The Non-Governmental Organisations (NGOs) working without Government’s help, have either almost ceased to exist or become inactive.  The NGOs working in the fields of education, health and other fields for building a better society and for creating value-awareness in people, are doing this primarily with the help of the government.

The source of value-awareness has been spirituality.  The combined or assimilated form of the collective mind’s desires and feelings is the foundation of the humanity.  But, the value system developed by socio-cultural behavior, government or governance, based on laws, rules and ethics, normally play the central or main role in society.  The market, socio-cultural behavior and change in lifestyle of human beings have greatly affected the value system. Thus, the present values are combined or assimilated form of laws, rules, market and socio-cultural behaviour of human beings and do not ensure whether they are humane or not.

Media also regards laws, rules, socio-cultural system, market-promoted consumerism as quite practical; and, on this basis, inform and educate people to build a better society. This results in creating the conflicting values of the humanity and also in forming, thus, the present value system of society. Only the enlightened people of the society can change this conflicting and inter-contradictory situation.  In this perspective, as long as the journalist himself does not accept and inculcate values and spirituality in his / her own personal and professional life, realize the roots of values and thereby become enlightened; he cannot be empowered to make us self-realized and also to inspire others through media.  The present urgent need is that the journalist himself/herself has to be ‘enlightened’ first in order to change the society, which is founded on the so called values of the current system, market and consumerism culture as well as behavior.

Hindi Text:

बेहतर विश्व-समाज के निर्माण के लिए प्रबुध्द मीडिया

मीडिया यूं तो उपकरण या माध्यम है। पत्रकार उसका उपयोग मध्यस्थता के रूप में करते हुए लोगों को प्रेरित और शिक्षित करता है। इसलिए जब हम प्रबुध्द,संबुध्द, उदित-ज्ञान या एनलाइटेंड मीडिया जैसे संबोधन करते हैं तो वे सीधे-सीधे पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए ही होते हैं। सूचना, विचार और उनका विवेचन पत्रकारिता है जिसे मीडिया व्यक्त करता है। इस अर्थ में मीडिया कहा जाना इस सब का समवेत अथवा समग्र है।

हम सभी बेहतर समाज, मानवीय मूल्यों पर आधारित समाज चाहते हैं। इसके लिए प्रयत्न भी करते रहे हैं। शासन और लोग मिलकर इसी लोक-आकांक्षा के लिए उपाय सोचते, विचारते और करते रहे हैं। इसमें पिछले कुछ वर्षों से एक फर्क आया है। कह सकते हैं, दो-तीन दशकों से धीरे-धीरे लोग सब कुछ शासन से ही अपेक्षा करने लगे हैं। समाज की अशासन इकाईयां या तो समाप्त हो र्गइं या निष्क्रिय हैं। शिक्षा, स्वास्थ सहित कई क्षेत्रों की इकाईयां भी अब शासन की सहायता से ही समाज की बेहतरी और मूल्य चेतना के लिए कार्य करती दिखाई देती हैं।

मूल्य चेतना का उत्स या केन्द्र बिन्दु अध्यात्म रहा है। समष्टि मन जो चाहता है और जो अनुभव रहे हैं उसका मिश्रित रूप ही मानवीयता का आधार है। शासन-प्रशासन जनित मूल्य व्यवस्था, विधान, नियम आदि केन्द्रित रहे हैं। बाजार और व्यवहार ने भी मूल्यों को प्रभावित किया है। इस तरह से वर्तमान मूल्यों का केन्द्र बिन्दु विधान, नियम, बाजार, व्यवहार आदि का समिश्र रूप है जो मानवीय ही हो यह निश्चय पूर्वक नहीं कहा जा सकता।

मीडिया भी विधान-नियम, व्यवस्था, बाजार और व्यवहार को व्यावहारिक आधार मानता है और उसके आधार पर ही समाज रचना के लिए लोगों को उत्प्रेरित करता रहा है। वर्तमान समाज मूल्यों के इसी व्दंव्द का परिणाम कहा जा सकता है जिसे समाज के प्रबुध्द लोग ही परिवर्तन कर सकते हैं। इस अर्थ में जब तक पत्रकार स्वयं उस मूल्य चेतना या उसके केन्द्र बिन्दु को स्वीकार नहीं करता या उसका स्वयं अनुभव नहीं करता, वह स्वयं प्रबुध्द नहीं होता, वह मीडिया के माध्यम से उस तरह की अभिव्यक्ति करने में आत्मिक रूप से सशक्त नहीं होगा। उसे व्यवस्था, बाजार और भोग जनित मूल्यों पर आधारित समाज को बदलने के लिए स्वयं प्रबुध्द होना ही आज की आवश्यकता है।