SPARC Wing Conference on “Rejuvenate, Innovate and Integrate” Inaugurated at Mount Abu

Mt Abu: The Brahma Kumaris and the SpARC Wing of the Rajayoga Education and Research Foundation(RERF) at Mount Abu jointly organised a seminar at Harmony Hall on the topic how to “Rejuvenate, Innovate and Integrate – where ancient wisdom inspires the future”.

The Chief Guest was Padma Bhushan, Dr. V.K. Saraswat, Member of NITI Aayog, Government of India, and the Chancellor of Jawaharlal Nehru University; and other Special Guests and Speakers were Rajyogini BK Asha, Director of Om Shanti Retreat Center, New Delhi; Rajyogini BK Ambika, Chairperson of SpARC Wing of RERF at Mt. Abu; Rajyogi BK Mruthyunjaya, Secretary General, Mount Abu; Dr. Sushil Chandra from Defense Research & Development Organisation(DRDO); Prof. Dr. Romesh Goutham, Senior Advocate, Supreme Court of India; and BK Saroj.

Dr. V.K. Saraswat said, the “Power of Silence only can bring Science and Spirituality to work together. We must think to combine our Policies or Decisions on the basis of Spirituality. Science thinks on the Truths of Material World while Spirituality works on our Thoughts and Attitudes. Now the question is how to combine Science and Spirituality to work together? The Power of Silence may be very useful in this aspect. Spirituality is concerned about our Consciousness, Self realization, and Science researches on Material things. We can get connected with the Supreme Power only through the Power of Silence. Then we can understand the highest state of Consciousness and our lives become Valuable and Purposeful.”

Rajyogini BK Asha said that Science and Spirituality are complementary to each other. They are neither separate nor opposite. She said that we all worship Sri Laxmi and Sri Narayan because they are the Authority of Moral Values. In order to become like them it is essential to know that we are Spirits apart from this Body. After this realisation of Soul our lives become invaluable and worthy of worship. Raja Yoga helps us immensly to have this Realisation.

Rajyogini BK Ambika stated that Spiritual Wisdom is to know the reality of Soul. She posed a question, “Can people all over the world remain ever spirited? The Godly knowledge which He delivered through the Corporeal medium of Prajapita Brahma has to be inculcated in our lives when that State of everlasting Joy in life is possible. By the practical use of this knowledge daily, we can experience that State of being in Joy and happiness forever. Our life becomes tranquil and successful.” She said, “It is essential that we have to make our society full of morality and that is what the present time demands.”

BK Mruthyunjaya in his address blessed and once again welcomed all the guests and the delegates. He said, “We are opening a Thought Library in all Colleges and Universities where they will learn the technique to produce Positive Thoughts. By such practice the nature and behavior of people change and their lives become Divine.”

Dr. Sushil Chandra of DRDO said on this occasion that SpARC is based on Spirituality and research. This Wing does Spiritual research for Spirituality. He described instances of research being conducted on various Rajyogis and expressed his admiration, stating, “How they were found to be able to maintain perfect stability of their Minds under all difficult situations, which is really a wonder.”

Professor Dr. Romesh Goutham said, “I will learn many things here before going back. On coming here I felt as if I have reached at an Extraordinary and some Super Natural Place. I totally forgot my office. I felt a different effect on my mind. It seemed everything is happening accurately. The Spiritual Peace that is available here is incomparable with all the Wealth and Material Property of the world.” He spoke about the greatness of Ancient Indian Wisdom.

In the very beginning of the Conference, the Chief Administrator of Brahma Kumaris, Rajyogini BK Dadi Janki, gave her blessings and well wishes to all through the video conference.

BK Saroj, at the end of the function, guided everybody to do RajaYoga meditation collectively. The entire program was very educative and full of Divine Vibrations.

Hindi News:
साइलेंस की शक्ति विज्ञान और आध्यात्म को करीब लाएगी : पद्म भूषण डॉक्टर वी के सारस्वत
आबू पर्वत ( ज्ञान सरोवर ) ४ अगस्त २०१८.
आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था, ” स्पार्क प्रभाग ” के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था – “रीजूविनेट , इंनोवेट , इंटीग्रेट . इस सम्मलेन में भारत वर्ष के विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया। दीप प्रज्वलित करके सम्मेलन का उदघाटन सम्पन्न हुआ।

नीति आयोग के सदस्य और जे एन यू के चांसलर पद्म भूषण डॉक्टर वी के सारस्वत ने आज मुख्य अतिथि के रूप में अपनी बातें रखीं। आपने कहा कि हम अपने फैसलों को किस प्रकार से आध्यात्मिकता के पुट से युक्त करें – हमको इसपर विचार करना है। विज्ञान भौतिक जगत के सत्य पर विचार करता है जब की आध्यात्मिकता हमारे मनोभावों – और विचारों आदि पर शोध करता है। प्रश्न है की विज्ञान और आध्यात्म को कैसे युक्त किया जाए ? साइलेंस की शक्ति इसमें कारगर हो सकती है। आध्यात्मिकता हमारी चेतना से सम्बद्ध है – हमरे जागरण से। जबकि विज्ञान पदार्थों पर शोध करता है। शांति की शक्ति से हम सर्वोच्च सत्ता से जुड़ सकते हैं और चेतना के शिखर को समझ सकते हैं। तब हमारा जीवन मूल्यवान और उपयोगी बन जाता है।


राजयोगिनी आशा दीदी , ओ आर सी की निदेशक ने कहा की विज्ञान और आध्यात्म एक दूसरे के पूरक हैं – एक दूसरे से दूर नहीं हैं – विरोधाभासी नहीं हैं । आपने बताया की हम श्री लक्ष्मी, श्री नारायण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि ये लोग सत्ता हैं ,मूल्यों के। मूल्यवान लोग हैं। भौतिकता से पूरी तरह युक्त हैं मगर पूज्य हैं। आज की दुनिया में आप सर्वाधिक अमीर व्यक्ति की भी पूजा नहीं करते। क्योंकि वे इस लायक नहीं हैं। धन है मगर वहाँ मूल्य नहीं है। मूल्यवान होने के लिए यह समझना जरूरी है की हम सभी अपने शरीर से अलग आत्मायें हैं। आत्मानुभूति के बाद ही जीवन मूल्यवान बनता है और पूज्य भी। राजयोग उसमें हमारी मदद करता है। इसके अभ्यास से हम पूज्य बन जाते हैं। शरीर पर हमारा वश है मगर मन पर नहीं है। मन हमारे वश में नहीं है। आत्मा को समझने के बाद वह हमारे वश में आ जायेगा। कहा गया है – मन को जीते जगत जीत। जगत जीत बनना बड़ी बात है मगर राजयोगिओं के लिए आसान है। राजयोगी बनने के लिए आपका स्वागत है।
रजयोगिनी अम्बिका दीदी, स्पार्क विंग की अध्यक्षा ने आज अपना सम्बोधन इस प्रकार प्रस्तुत किया। आपने कहा की आध्यात्मिक प्रज्ञा आत्मिक सत्य को समझना है। क्या दुनिया में सभी लोग सदैव उत्फुल्ल रह सकते हैं ? परमात्मा का ज्ञान जो उन्होंने प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के माध्यम से प्रदान किया है – उसको जीवन में आत्म सात करने से वैसी स्थिति प्राप्त की जा सकती है। दैनिक जीवन में आत्मिकता की अनुभूति से हमारा जीवन पूरी तरह संतुलित और सफल बन जाता है। हम अपने समाज को एक मूल्यवान समाज बनावें। यह आज की अनिवार्यता है।
ब्रह्माकुमारीज़ के कार्यकारी सचिव राजयोगी मृत्युंजय ने अपना आशीर्वचन दिया। आपने सम्मेलन में पधारे हुए महानुभावों का फिर से स्वागत किया। आपने बताया की हम विश्वविद्यालयों में और कॉलेजेस में थॉट लाइब्रेरी की स्थापना कर रहे हैं। वहाँ लोग सकारात्मक विचारों को उत्पन्न करेंगे और उसकी विधि भी जानेंगे। इससे लोगों के संस्कार सुधरेंगे और जीवन दिव्य बनेगा।
डी आर डी ओ से पधारे डॉ सुशील चंद्र ने आज के अवसर पर कहा की स्पार्क आध्यात्मिकता और शोध पर आधारित है। यह संस्था आध्यात्मिकता पर और आध्यात्मिकता के लिए शोध करती है। आपने राजयोगियों पर किये गए अनेक शोधों का विवरण दिया और बताया की कैसे विभिन्न परिश्थितियों में भी उन राजयोगिओं ने काफी अच्छी मानसिक स्थिति बरकरार रखी।
प्रो डॉक्टर रोमेश गौतम , वरिष्ठ अधिवक्ता , सर्वोच्च न्यायालय ने आज के अवसर पर अपनी बातें इस रूप में रखीं। आपने कहा कि मैं यहां से काफी कुछ सीख कर जावूंगा। यहां आकर ऐसा लगा की मैं एक असामान्य और अलौकिक स्थान पर पंहुचा हूँ। मैं अपने ऑफिस तक को भूल गया हूँ। ऐसा एक अलग सा प्रभाव इस स्थान का मेरे मन पर पड़ा है। लग रहा है की सब कुछ ठीक ही हो रहा होगा। यहां आकर जो आत्मिक शांति मिलती है उसकी तुलना धन दौलत से नहीं की जा सकती है।
आपने प्राचीन भारतीय ज्ञान के बारे में बताया।
डॉ जयश्री ने कहा की मैं यहाँ सीखने के लिए आयी हूँ। मुझे यहाँ काफी सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो रही है। मैं यहाँ से काफी कुछ सीख कर जाने वाली हूँ। आम तौर पर लोग मानते हैं की विज्ञान से जुड़े लोग नास्तिक होते हैं जो की बिलकुल सही नहीं है। मैं पूरी आस्तिक हूँ। संसार की हर घटना से सर्वोच्च सत्ता की उपस्थिति प्रकट होती रहती है। दुनिया वालों को और कैसा प्रूफ चाहिए उनके होने का ?? जीवन में संतुलन का बड़ा महत्व है। उसके लिए आध्यात्म सहयोगी होगा।
ग्यारह वर्षीय हिमांग, सोशल इन्नोवेटर, ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया और अपनी यात्रा के बारे में बताया। कहा की मेरी यात्रा की सफलता में मेरे माता पिता की बड़ी भूमका रही है। मैंने रोबोटिक्स से शुरुआत की और नेशनल चैंपियन बना। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ की मेरे साथ कुछ बड़ा घट गया है। और उसके बाद मेरा सफर बढ़ता ही चला गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में ही ब्रह्माकुमारीज़ की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी जी ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से अपना आशीर्वाद सभी को दिया। 
ब्रह्मा कुमारी सरोज बहन ने योगाभ्यास करवाया।

(रपट :बी के गिरीश , ज्ञान सरोवर। )