Vice Chancellor​ of JNU Inaugurates University and College Educators’ Conference at Mount Abu

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Mount Abu- Gyan Sarovar: “The world now faces a plethora of problems. The time has now come to understand that we cannot go on with the business as usual. Innovation in linear way is not sufficient and sustainable. We have to understand the importance of values and spirituality and bring them back to life if we are to build a sustainable and inclusive society.” Prof. M. Jagadesh Kumar, Vice Chancellor, JNU, New Delhi said this while inaugurating the University and College Educators’ Conference on Value Education & Spirituality, as Chief Guest,

Dadi Janki, Chief of the Brahma Kumaris, said, “The three Om Shanti refers to “Who am I?, Who is mine? and What have I to do here? God has taught me the art of life and has given me the thought of doing good to others. It is the values of Truth, Cleanliness and Simplicity that have worked wonders in my life.”

B.K. Nirwair, Secretary General & Chairperson, Education Wing, said, “Other universities are making teachers, doctors, engineers but the Brahma Kumaris University is making the human beings deities through value education, spiritual education and Rajyoga, thereby justifying the saying “Man is made in the image of God”. He appealed to the educators to discover, identify and inculcate the values them in their personal life first before teaching them to the students.

B.K. Mruthyunjaya, Vice Chairperson, Education Wing, said, “Today, the saying “Knowledge is power” means the power to make money instead of man-making. The Brahma kumaris is working to make India a Divine India, going a step ahead of Digital India. Today, we develop solar power but have forgotten soul power. The Gyan Murli of Brahma Kumaris opens the third eye of knowledge. The holistic Value & Spiritual Education will make India Vishwa Guru.”

Prof. S.A. Kori, Executive Director-cum-Member Secretary, Karnataka State Higher Education Council, Bengaluru, praised highly the Brahma Kumaris for working for the spiritual uplift of the humanity through Value Education & Spirituality, which our education policies and universities have failed to do so. He said, “Education opens the mind but spirituality opens the heart.”

Sister B.K. Shukla, Director, ORC, Gurugram, said, “Today’s education is almost directionless. Value & Spiritual Education can fill one with knowledge, qualities and powers; awaken the human spirit and help in leading a balanced life.”

Dr. Manpreet Singh Mann, Director, AICTE, New Delhi, said, “Today, the major deficiency is the mental deficiency. We think much but do not contemplate and churn at all. We have failed to give mental health to our children and students. Consequently, as a result, consumer market, India is placed in 3rd rank in the world but in innovation it has 63rd rank in the world.”

Prof. Ved Prakash, former Chairman, UGC, New Delhi, threw light on the fundamental duties enshrined in the Constitution of India and appealed to the teachers’ community to identify values in them and try to inculcate them personally and help the students to inculcate them in life.

Dr. B.K. Harish Shukla, National Co-ordinator, Education Wing (RERF), heartily welcomed the guests and speakers on the dais and the audience, and said that the world can change only with the power of spirituality.

Dr. B.K Pandiamani, Director, Value Education Programme, detailed about the various Value Education & Spirituality courses offered in 11 languages through 13 universities.​

Hindi Press Release: 

मूल्य-अपनाने के लिए हैं , सिखाने के लिए नहीं : राजयोगी निर्वैर
ज्ञान सरोवर ( आबू पर्वत ),१३ मई २०१७ । आज ज्ञान सरोवर स्थित हार्मनी हॉल में ब्रह्माकुमारीज एवं आर ई आर एफ की भगिनी संस्था ,शिक्षा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक अखिल भारतीय शिक्षाविद सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मलेन का मुख्य विषय था – “मूल्य शिक्षा एवं अधाय्तम ” . इस सम्मलेन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधिओं ने भाग लिया . दीप प्रज्वलित करके इस सम्मेलन का उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

ब्रह्मा कुमारीस की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी जी ने अपना आशीर्वचन दिया और कहा की -परमात्मा से ५ नाते जोड़ लो। माता -पिता शिक्षक -सखा तथा सतगुरु का। प्रयत्न कौर की आत्मिक स्थिति -निराकारी स्थिति हमेश बनी रहे। जीवन में किसी बात का कोई अभिमान कभी ना आ पाए। कोई विकार न रहे – कोई कमजोरी न रहे। राजयोग को अपना लो। सदैव शुभ चिंतन में रहो। सच्चाई ,सफाई और सादगी रखो। हार मानना सीखो परिवार में – दोस्तों में। सभी झगडे समाप्त हो जाएंगे।

ब्रह्मा कुमारीस संस्थान के महासचिव तथा शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष राजयोगी निर्वैर ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा की- सम्मलेन की सीख के आधार पर कुछ नई शुरुवात के लिए आप सभी को मेरी तरफ से बधाई।

आपने सभी शिक्षाविदों से पूछा – वैल्यूज क्या सिर्फ विद्यार्थिओं के लिए – समाज के लिए या हमारे खुद के लिए भी अनिवार्य हैं ? निर्वैर जे ने बताया की हम समाज को या बच्चों को या किसी को भी तभी मूल्यवान बना पाएंगे जब हम खुद मूल्यों के वाहक बनेंगे। हमें म्यूजियम बनना होगा। गाँधी -रबिन्द्र नाथ टैगोर -पिता श्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के जीवन से मैंने काफी कुछ सीखा है। गाँधी जी – टैगोर तथा बाबा ब्रह्मा, सभी ने मूल्यों को अपने जीवन में गहराई से अपनाया था। अनुभव में लाये बगैर कभी किसी को सलाह नहीं दिया।

अतः हम सभी को पहले अपना जीवन मूल्य वान बनाना होगा तभी विद्यार्थी को तथा समाज को मूल्य वान बना सकेंगे। हमन बदलेंगे – जग बदलेगा।
विशिष्ठ अतिथि जे एन यू के कुलपति प्रोफ एम जगदीश कुमार जी ने कहा कि मैं जैसे जैसे संसथान को जान रहा हूँ मुझे महसूस हो रहा है की मैं वरदान प्राप्त करता जा रहा हूँ। आज हम देख रहे हैं की संसार किस अधोगति को प्राप्त करता जा रहा है। सब कुछ होते भी जैसे की एक शून्य की स्थिति है जीवन में। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम बाहर भरपूर हो गए हैं मगर भीतर से खाली के खाली रह गए हैं। हमारी आतंरिक शक्तियां खो गयी हैं। उनको प्राप्त करना होगा आध्यात्मिक बल से। हम सभी को आज यह शपथ लेना है की हम् सभी अपने ग्रह को शांत – दीर्घकालीन जीने लायक और मूल्य वान बनाएंगे।

मुख्य अतिथि डॉक्टर एम् एस मन्ना , अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् दिल्ली के निदेशक, ने कहा की मैं भाग्यशाली हूँ की आज मैं इस सभागार में उपस्थित हूँ। सुबह से ही मैं यहां खुद को सकारात्मकता से घिरा हुआ महसूस कर रहा हूँ। यह ऊर्जा कहाँ से आती है ?? आज के युवा किस दिशा में जा रहे हैं ?

हमने अपने बच्चों को सब साधन दे दिया मगर मानसिक स्वस्थ नहीं दे पाए। नेट की दुनिया ने बच्चों से परिवार छीन लिया है। दादा दादी छीन लिया है। उनकी अनुभव युक्त शिक्षा छीन ली है। ज्ञान सरोवर जैसा संस्थान चाहिए जहां माता पिता और बच्चे एक साथ मूल्यों की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे सम्मेलनों की जरूरत इसलिए हैं की हम भटक गए हैं और हमें मार्ग चाहिए। राजयोग ही वह सही मार्ग है जो हमें शक्तिशाली बना देगा।
विशिष्ठ अतिथि पंकज एल जानी , डॉक्टर बाबा साहब आंबेडकर खुला विश्व विद्यालय अहमदाबाद के कुलपति, ने कहा की ब्रह्म कुमारीस के मूल्य शिक्षा के इस पाठ्यक्रम को आज हमने स्वीकार कर लिया है। मुझे इस बात की काफी प्रसन्नता है। आज हम अपने बच्चों को सही शिक्षा नहीं दे रहे हैं। उनको वास्तविकता से दूर लेकर जा रहे हैं। इसकी कीमत चुकानी होगी। मूल्य निष्ठ शिक्षा देनी ही होगी अन्यथा अकल्याण हो जायेगा। मूल्य निष्ठ शिक्षा के लिए इस आध्यात्मिक संस्थान के अलावा और कौन प्रदान कर पायेगा ?

ब्रह्मा कुमारीस शिक्षा प्रभाग के उपाध्यक्ष राजयोगी मृत्युंजय ने पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राधा कृष्णन के हवाले से कहा की देश का निर्माण कक्षाओं में होता है। दुनियावी कक्षाओं के अलावा आध्यात्मिक कक्षाओं में यह कार्य सफलता पूर्वक हो पायेगा। हमारी शिक्षाओं के आधार पर जो संसार बनेगा वह हर प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से मुक्त होगा। हमारी आध्यात्मिक शिक्षाओं से आतंरिक प्रकाश फैलेगा संसार में और यहां का अन्धकार मिटेगा। खुद को समझ कर और खुदा से जुड़ कर हम अपना और संसार का जीवन श्रेष्ठ बना पाएंगे। हर प्रकार की सांसारिक शिक्षा में आध्यात्मिक शिक्षा का पुट आवश्यक होना चाहिए।

अति विशिष्ठ अतिथि प्रोफ वेद प्रकाश जी, पूर्व अध्यक्ष, विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ने कहा की मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर हूँ खुद को। आज संसार में शिक्षा का काफी प्रचार और प्रसार हो चुका है मगर वैश्विक मूल्य आज भी लुप्त हैं। क्यों है ऐसा? हम कैसे इस स्थिति को बदल सकेंगे ? सर्वांगीण विकास कैसे होगा मानवता का ? हम आज भी तलाश में ही लगे हैं। ब्रह्मा कुमारीस विश्व विद्यालय अनेक वर्षों से आध्यात्म के द्वारा मानवता का विकाश कर रही है। हम अपना लक्ष्य तब तक नहीं प्राप्त कर पाएंगे जब तक हम अपने आतंरिक मूल्यों को उजागर नहीं कर लेंगे। आध्यात्मिक शिक्षानों के साथ साथ इसमें वैश्विक मान्यताएं और संवैधानिक मान्यताएं हमारी मदद करेंगी।

विशिष्ठ अतिथि कर्णाटक राज्य उच्चतर तकनीकी शिक्षा परिषद् के कार्यकारी निदेशक तथा सचिव प्रो एस ए कोरी ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम को याद करते हुए कहा की वे ऐसा मानते थे – “वसुधैव कुटुम्बक आज ब्रह्मा कुमारियों के प्रयत्नों से साकार हो चला है”। आपने कहा की मैं इस संसथान की सेवाओं को सलाम करता हूँ। इनकी सेवाएं सभी के लिए हैं -बिना भेद भाव के हैं – और निः शुल्क हैं। सभी धर्मों में आध्यात्म का पुट है – थोड़ा भेद भी हो सकता है। मगर सभी की शिक्षाएं सामान ही हैं।

मूल्य शिक्षा की आज काफी जरूरत है। मूल्य शिक्षा आपको एक अनूठा इंसान बनाती है। आपकी आतंरिक शक्तियों को जगाती है। ब्रह्मा कुमारियाँ अनेक वर्षों से आध्यात्म की शिक्षा प्रदान कर रही हैं।

शिक्षा प्रभाग के राष्ट्रीय समन्वयक राजयोगी डॉक्टर हरीश शुक्ल ने अतिथियों के स्वागत भाषण के क्रम में कहा की हमारी यह संस्था एक आध्यात्मिक विश्व विद्यालय के रूप में विश्व में स्थापित है। आपने कहा की चरित्र से राष्ट्र महान बनता है और उसके लिए चाहिए आध्यात्मिक शिक्षा। आत्मिक भाव में रहकर और परमात्मा से युक्त होकर हमारी दादी जानकी जी आज विश्व की ऐसी ही आध्यात्मिक सेवा कर रही हैं। आपने कहा की शिक्षकों की काफी बड़ी जिम्मेवारी है। अतः शिक्षकों को ऐसे आध्यात्मिक सम्मलेन का पूर्ण लाभ लेकर संसार का कल्याण करने के लिए आगे बढ़ना है।

ॐ शांति रिट्रीट सेंटर गुड़गांव की निदेशक राजयोगिनी शुक्ला ने आज के अवसर पर कहा की अंदर की सुषुप्त शक्तियों को जो जगा दे वही है वास्तविक शिक्षा। आज की शिक्षा अलग है। आज की शिक्षा के कारण युग भटक रहा है। मूल्य शिक्षा द्वारा आज भी हम हमारे अंदर छिपी शांति -शक्ति और प्रेम की ऊर्जा को जगा सकेंगे। ईश्वरीय शिक्षा द्वारा ऐसा अनेक वर्षों से हो रहा है। आध्यात्मिक शक्ति अर्थात आत्मिक शक्ति को जगा कर अपनी अंतरिक शक्तियों को लाखों लोगों ने जगाया है। राजयोग के अभ्यास से अनेक लोग जीवन को सही दिशा में ले कर जा रहे हैं। राजयोगिनी शुक्ला बहन ने योगाभ्यास करवाया। आत्म अनुभूति करवाई।
ब्रह्म कुमारीस मूल्य और अध्यात्म दूरस्थ शिक्षा के निदेशक डॉक्टर पंडियामणि ने आज के अवसर पर बताया की आज भारत की ११ भाषाओं में मूल्य शिक्षा और आध्यात्म की शिक्षा विभिन्न विश्व विद्यालयो में प्रदान की जा रही है। इस कोर्स का ७ प्रोग्राम अभी जारी है। भारत के कुछ खुले विश्व विद्यालयों में भी आध्यात्म का यह कोर्स प्रदान किया जा रहा है। बाबा साहब आंबेडकर विश्व विद्यालय , अहमदाबाद में भी इस वर्ष से मूल्यों का यह पाठ्यक्रम प्रारम्भ होगा।

शिक्षा प्रभाग के कार्यकारी सदस्य ब्रह्मा कुमार मेहर चंद ने प्रतिभागियों को धन्यवाद् दिया। ब्रह्मा कुमारी रवि कला जी ने मंच सञ्चालन किया।

(रपट :बी के गिरीश , ज्ञान सरोवर , मीडिया। )