Kerala Governor Arif M. Khan inaugurated the All India Bhagavad Gita Mahasammelan

184
भारत में संत और मनीषियों को आदर्श माना गया है, न कि राजाओं को: राज्यपाल खान
– अखिल भारतीय भगवतगीता महासम्मेलन का केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया शुभारंभ
– संत-महात्माओं और महामंडलेश्वर का चंदन की माला, पुष्पगुच्छ से किया गया स्वागत

आबू रोड/राजस्थान (निप्र)। ब्रह्माकुमारीज संस्थान के शांतिवन परिसर में आयोजित अखिल भारतीय भगवतगीता महासम्मेलन का शुभारंभ केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया। पांच दिवसीय महासम्मेलन वर्तमान नाजुक समय के लिए गीता के भगवान की श्रीमत विषय पर आयोजित किया जा रहा है।
देशभर से आए संत-महात्मा, महामंडलेश्वर को संबोधित करते हुए राज्यपाल खान ने कहा कि मैं आपको ज्ञान देने नहीं बल्कि अपनी जिज्ञासाओं को मिटाने आया हूं। आप सभी महान विभूतियों को मैं नमन करता हूं। हमारी भारतीय संस्कृति में संत, महात्माओं, तपस्वियों और मनीषियों को आदर्श माना गया है न कि संतरी-राजाओं को। क्योंकि हमारी सभ्यता और संस्कृति आध्यात्म पर आधारित है। भारत का धर्म ही आध्यात्मिकता है। हमारी सभ्यता और संस्कृति आत्मा से परिभाषित होती है न कि वेशभूषा, रंग और धार्मिक पूजा-पाठ की विधियों से। संतों के साथ बैठने से अनाशक्ति पैदा होती है। अनाशक्ति से मोह भंग होता है और जब हमारा इस संसार से मोहभंग हो जाता है, ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है तो हम परमात्मा के समीप पहुंच जाते हैं। भगवत गीता में दिया गया ज्ञान सबसे श्रेष्ठ और जीवन जीने की कला सिखाने वाला ज्ञान है।
वैदिक काल से है हमारी परंपरा- खान
राज्यपाल खान ने कहा कि भारतीय परंपरा वैदिक काल से है। बाकी अन्य धर्म कोई 2500 वर्ष, 1500 वर्ष और 1200 वर्ष पूर्व ही आए हैं लेकिन हमारी सनातन संस्कृति सबसे प्राचीन है। योगा वह है जो अनेकता में एकता पैदा कर दे। गीता में कहा गया है कि जहां योगेश्वर कृष्ण होंगे, योगेश्वर कृष्ण अर्थात जहां ज्ञान, प्रज्ञा होगा वहां आत्मसुख हासिल होगा। गीता में कहा गया है और सभी वेदों का सार यही है कि हमें जीवन में ज्ञान प्राप्त करना चाहिए और जब ज्ञान प्राप्त हो जाए तो उसे दूसरों के साथ बांटना चाहिए। ताकि उनका भी कल्याण हो सके। ऐसे ही ज्ञान को बांटने का कार्य राजयोगी भाई-बहनें कर रहे हैं। हमारी संस्कृति में देने का भाव रहा है। भारत की बुनियाद मानस में है। भारत उस मानस की शक्ति से निरंतर अपने में सौगात पैदा करता है। मैं भारत से अगाध प्रेम करता हूं। मेरे प्रेम का मतलब यह नहीं है कि मैं यह मिट्टी भूगोल के हिस्से को मूर्ति का रूप देकर उसकी उपासना करूं। इस धरती पर पैदा हुआ इसलिए भी प्रेम नहीं करता हूं। इस देश से इसलिए प्रेम करता हूं कि भारत दुर्गम परिस्थिति में शब्दों को बचाकर रखा है। भारत की खूबी बुद्धिमत्ता और आध्यात्मिकता है।
एकता लाने का प्रयास कर रही ब्रह्माकुमारीज-
राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज के ये राजयोगी भाई-बहनें दुनियाभर में अनेकता में एकता लाने का प्रयास कर रहे हैं। ये जिस समर्पण भाव से विश्व सेवा में जुटे हैं वह सराहनीय है। इतनी बड़ी संस्था का संचालन हमारी बहनों, मातृशक्तियों द्वारा किया जा रहा है जो नारी शक्ति की महिमा बताता है।
परमात्मा के श्रेष्ठ कार्य में बनें सहयोगी-
मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी ने कहा कि परमपिता परमात्मा की अवतरण भूमि में आप सभी का स्वागत है। परमात्मा कहते हैं- मीठे बच्चे मैं ज्योतिर्बिंदु परमात्मा आप सभी ज्योतियों से मिलकर बहुत खुश हो रहा हूं। मेरा नाम शिव है। मैं ऊंचे ते ऊंचे परमधाम का रहने वाला हूं। मैं ब्रह्मा के तन में परकाया प्रवेश कर नई दैवी दुनिया की स्थापना करता हूं। आप सभी इस महायज्ञ में शामिल होकर परमात्मा के श्रेष्ठ कार्य में सहयोगी बने हैं।
निराकार परमात्मा ने की है इस विश्व विद्यालय की स्थापना-
संस्थान के अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन ने कहा कि विश्व विद्यालय उसे कहा जाता है जहां सारे विश्व के इतिहास अर्थात् यहां दैवी-देवताओं का राज्य कब होता है, कैसे होता है। भूगोल अर्थात सृष्टि के चारों चक्रों का ज्ञान बताया जाए, उसे विश्व विद्यालय कहते हैं। ब्रह्माकुमारी विश्व विद्यालय की स्थापना स्वयं निराकर परमात्मा ने की और इसके कुलपति हैं प्रजापिता ब्रह्मा। इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले और पढऩे वाले भाई बहनों को ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी कहते हैं। भगवान कहते हैं सृष्टि के अंत में मैं ऐसा यज्ञ रचता हूं जिसमें देवी-देवता बनने की शिक्षा दी जाती है। भगवान ने गीता में कहा है कि जिसके कर्म ब्रह्मा के समान अर्थात् ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला, ब्रह्म को जानने वाला हो, वही सच्चा ब्राह्मण है। यह ज्ञान यज्ञ स्वयं परमपिता परमात्मा द्वारा स्थापित अविनाशी रुद्र गीता ज्ञान यज्ञ ही है। धार्मिक प्रभाग की अध्यक्षा बीके मनोरमा दीदी ने स्वागत भाषण दिया। प्रभाग की उपाध्यक्षा बीके गोदावरी ने सभी अतिथियों का सम्मान किया। मुख्यालय संयोजक बीके रामनाथ भाई ने सभी का आभार माना। संचालन ओआरसी की निदेशिका बीके आशा ने किया।
संतों का किया सम्मान-
महासम्मेलन में देशभर से आए संत-महात्मा का चंदन की माला, शॉल और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। मधुरवाणी ग्रुप ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुंबई से आईं सुप्रसिद्ध गायिका बीके अस्मिता ने आइना साफ किया, साफ नजर तू आया…, अहमदाबाद की डॉ. बीके दामिनी बहन, बीके युगरतन ने मधुर आध्यात्मिक गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया। इस दौरान यदा-यदा हि धर्मस्य ग्लानि…. पर सुंदर नाटय प्रस्तुति दी गई। इस दौरान गीता में वर्णित युद्ध हिंसक नहीं अहिंसक था विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले सुरेश डांगी को ब्रह्माकुमारीज की ओर से राज्यपाल ने एक लाख रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया।
Previous articleNational Media Conference Concluded
Next articleManmohinivan- 46th Mind-Body Medicine Conference-2022