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भगवान की कृपा होती है तब व्यक्ति को ऐसे सुंदर स्थल पर आने का सौभाग्य प्राप्त होता है। यहॉँ के लोग, परिवेश, वातावरण सब कुछ अचंभित करने वाला है। लगता ही नहीं है कि हम इस पृथ्वी पर हैं। समस्त दुनिया को यह संस्था नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने का सराहनीय कार्य कर रही है।
श्री नितिन चंद्रा, आईएएस |
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I attended the basic 7 days course of Rajyoga, as offered by Brahma Kumaris, and found it very efficacious for realizing the peace embedded in our soul. Brahma Kumaris teach how to derive spiritual strength from God by connecting with that Supreme Soul. I want to be a part of this organization, which is igniting the lamp of spirituality in human souls.
Mrs. Rama Devi |
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To my observation, Prajapita Brahma Kumaris Organization is a unique spiritual organization in this country. The prime objective of this organization is to build moral character of every individual human being. By following the teachings given here one can change from ‘NARA to NARAYAN.’ The most powerful spiritual word ‘OM SHANTI’ is the one and only mantra of the sisters and brothers of this holy Organization. The chanting of this mantra has tremendous effect over this present society. I have been associated with this organization for the last 30 years though not directly, but I have attended a number of their programmes and have been inspired by the conduct and sweet cordial behaviour of the committed brothers and sisters of this institution. The discipline and orderly life in Brahma Kumars is quite impressive. I wish and pray before Shiv baba and Brahma Baba to bless them with all success.
Mr. Shashi Bhusan Behera |
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I had a great desire to see India, for I had enjoyed Indian films. Incidentally, I got answers to all my questions when I came into contact with Brahma Kumaris, particularly when I attended their Peace of Mind Retreat. I learnt, for instance, that the essential quality of the soul is peace and absolute goodness, and that God, the Supreme Father, is the wisest of the wise. This brought about a significantly positive change in my life. Spiritual knowledge has helped me in healthcare and in my social work in Kazakhistan. My relations with people around have become harmonious. I would like to mention that my soul has naturally accepted the Brahma Kumaris’ philosophy of life.
Mrs. Roza Absalova |
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I have known the Godly University of ‘Brahma Kumaris’ closely for the last few years and had occasion to visit its Head Quarters at Mount Abu, Rajasthan. It is a fact that the spiritual knowledge and practice of ‘Raj Yoga’ disseminated by this University is of high order and of immense use for the individuals. The regular practice of ‘Raj Yoga’ brings about changes in body and mind resulting in peace and positivity. One of the unique features of this Institution is the daily study of “Murali” which rekindles the individual mind on a day to day basis leading to gradual shedding of negativity and bad habits and bringing peace and happiness in the society which is dream of our Holy Scriptures and Forefathers. I hope and trust that the pious spiritual activities of this Institution having branches in almost 137 countries all over the world will be able to generate momentum towards bringing peace and happiness in the society at large.
Mr. Pratap |
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मेरा सौभाग्य है कि मुझे माउण्ट आबू में आने का अवसर मिलता है। परमात्मा से मिलना मेरे लिए बड़ी बात है। इतनी बड़ी संख्या में लोग होने के बाद भी हर एक से परमात्मा का संवाद होता है। हर एक समझता है- परमात्मा मेरे से बात कर रहा है। परमात्मा की दृष्टि मिलते ही शरीर का प्रत्येक अंग रोमांचित हो जाता है और उसके स्नेह का लेप लग जाता है। यह सच है कि परमात्मा अवतरित होकर अपने बच्चों के लिए नई दुनिया की स्थापना कर रहा है। आप भी परमात्मा से मिलना चाहते हैं तो यह सुनहरा अवसर है।
श्री रमेश माने, एक्यू प्रेसरिस्ट-मैसेर, भारतीय क्रिकेट टीम |
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The Brahma Kumaris Complex located in Mount Abu is a charming place. There is an air of quiet and efficiency. The Brahma Kumaris over the years have succeeded in establishing a worldwide movement of spiritual consciousness. In the outside, we are all distinct and separate. However, in the inner world of spirituality we are one. The Brahma Kumaris have been telling us this simple message of spirituality. Brahma Kumaris Complex is astounding. It is an epitome of discipline. What I learnt was that disciplined conduct is the hallmark of spiritual life. In the realm of philosophy we understand; but in the area of practice we work out whatever we know. A spiritual life is impossible without spiritual practice. Brahma Kumaris conference opened my eyes to fantastic practice of spiritual activities. Needless to say, this spiritual movement is our best hope in a conflict‐ridden world. Mr. Ramesh Chandra Misra, |
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This Institution is special not only because its face are the divine sisters who are seeking to attain shanti (peace) through their connection with the souls of suffering humanity, but alsobecause of its organizational strength & source of financial sustenance. It truly deserves Nobel Prize for Peace.
Mr. Gautam Ray, IRS, |
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Prajapita Brahma Kumari Ishwariya Vishwa Vidyalaya, Mount Abu and its centers located across the globe is providing yeoman’s service to the mankind. This organization is well‐known and well‐recognized throughout the world for its teachings and practices on Stress‐Free Lifestyle, Art of Thinking Right, About Living Values, Exploration of Inner Powers, Management of Self and Harmony in relationships, Emotional Intelligence and on Leadership Skills. The customized training sessions organized for different professionals round the year are very useful and they enhance spiritual potential of the individual. It brings in right orientation and thereby adds value to life of every individual who are exposed to these useful teachings. Please accept my heartfelt appreciation for the good work and best wishes for future endeavours. Dr. K. Subramaniam, IFS, |
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ब्रह्माकुमारी राजयोग सेवाकेन्द्र आध्यात्मिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रयोग द्वारा मानव का बहु आयामी व्यक्तित्व विकास के कार्य में बहुत बड़ा योगदान दे रहा है। यह संस्था आध्यात्मिकता के अनुप्रयोग के तौर पर लोगों के जीवन का हिस्सा बन रही है। इस संस्था ने ज्ञान को मानव जीवन रूपी प्रयोगशाला में प्रयोग करने का साधन बना दिया है। ब्रह्माकुमारी॰ज की मान्यता है कि जो कुछ व्यक्ति के अन्दर है वही उसके बोल, व्यवहार और आचरण में प्रकट होता है। सभ्य बोल और सत्कर्म के लिए अन्दर की शुद्धि आवश्यक है। व्यक्ति का कर्म श्रेष्ठ और व्यवहार सरल होना चाहिए तथा मन और चित्त स्वच्छ होना चाहिए। यदि अन्दर की सुन्दरता, सुव्यवस्थित है तो स्वाभाविक रूप से चाल-चलन अच्छे होंगे। वर्तमान समय में व्यक्ति को मूल्यों और गुणों का रोल मॉडल बनकर प्रस्तुत होना होगा, तभी उसका समाज औरR Rदत श्दत् श्रोताओं पर प्रभावकारी असर पड़ेगा। ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दिए गए ज्ञान-योग से व्यक्ति स्वयं का जीवन सुसंयमित एवं सुव्यवस्थित कर लेता है। आंतरिक क्षमता और शक्ति का विकास होता है जिससे वह प्रशासनिक और व्यवस्थापन के क्षेत्र में आने वाली विपरीत परिस्थितियों को सकारात्मक दृष्टिकोण से समाधान कर सकता है। ऐसे महान कार्य में समर्पित संस्था का मिशन सफल हो, मेरी शुभकामना है।
श्री लीलामणि पौडेल, |
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मैं रायपुर में वर्ष 2001 से निवास कर रहा हूँ तथा सपरिवार इस संस्था से जुड़ा हुआ हूँ। मैं इस संस्था की विभिन्न गतिविधियों में भाग लेता हूँ। यह संस्था ध्यान शिविरों तथा विभिन्न प्रवचनों के माध्यम से लोगों को यह अनुभव कराती है कि वह एक आत्मा है, आत्मा परमात्मा से जुड़ी है तथा परमात्मा प्रत्येक आत्मा को खुश देखना चाहता है। संस्था द्वारा ख्याति प्राप्त चिकित्सकों के माध्यम से तन एवं मन को औषधि एवं व्यायाम से स्वस्थ रखने के लिए बहुत सरल एवं उपयोगी उपाय बताये जाते हैं जिनसे व्यक्तिगत रूप से मुझे बीमारियों को ठीक करने तथा रोकने में बहुत सहायता मिली। संस्था की बहनों तथा भाइयों के कर्तव्य के प्रति समर्पण अद्वितीय है जो कि प्रत्येक आगन्तुक को अपनेपन का अहसास कराता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि संस्था का उत्तरोत्तर विकास होगा तथा इससे जुड़ने वाले व्यक्ति को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहकर सुखी एवं शान्तिपूर्ण जीवन व्यतीत करते हुए परमात्मा के सानिध्य का आनन्द प्राप्त कर सकेंगे।
श्री ए.के. सिंह, |
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मैं वर्ष 2007 में अपनी पारिवारिक समस्याओं से परेशान था। टी.वी. में अवैकिंनंग विद ब्रह्माकुमारी॰ज कार्यक्रम देखने के पश्चात 7 दिन का राजयोग कोर्स किया। परमात्मा के महावाक्य `मुरली’ भी सुनने लगा । यहां प्रतिदिन आने से मेरेअंदर काफी सकारात्मक परिवर्तन आया। मुझे कैसे रहना है, यह भी मैं सीखता जा रहा था। धीरे-धीरे कब स्वंय बदल गया, मुझे पता ही नही चला। ब्रह्माकुमारी॰ज के शान्ति सरोवर, रायपुर के सेवाकेन्द्र पर जाने से अलौकिक शान्ति का अनुभव होता है। पहले गुस्सा करना मेरा संस्कार था। अब भी कभी-कभी गुस्सा करता हूँ परन्तु अब इसकी आवृत्ति बहुत कम हो गई है। अब गुस्सा करने के दौरान ही मुझे कई बार ज्ञात हो जाता है, मैं वहीं से वापसी नहीं भी करता तो तत्काल बाद या रात्रि में उस दृश्य को इमर्ज करके मुझे सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत कौन सा वैकल्पिक रिस्पान्ड कर सकता था, सोचता हूँ और फिर उसका काल्पनिक चित्रांकन भी करता हूँ ताकि बाद में वैसी ही परिस्थिति आने पर वैकल्पिक चित्रांकन से बने संस्कार के अनुसार रिस्पान्ड करूं।
श्री आनंद तिवारी, भा.पु.से. (से.नि.) |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय शान्ति सरोवर, रायपुर आज की भौतिक जिन्दगी की आपा-धापी की भागदौड़ में मानव-मन की शान्ति-विश्रान्ति के लिए एक शीतल एवं शान्त सरोवर की तरह कार्य कर रहा है, जहॉँ इस आध्यात्मिक सरोवर में थके-हारे मनुष्य डुबकी लगाकर पुनः ऊर्जावान बन रहे हैं। इनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक संदेश हो या फिर समय-समय पर आयोजित शिविर अत्यन्त लाभकारी है। मानसिक एवं ह्दय से सम्बन्धित बीमारियों के लिए भी उपयुक्त साबित हुआ है। मुझे स्वयं इनके द्वारा आयोजित शिविर में हिस्सेदारी करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है और यह मेरे स्वयं के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करने के लिए अत्यन्त लाभकारी सिद्ध हुआ है। इस श्रेष्ठ कार्य में लगे हुए सभी भाई एवं बहनों को मेरा धन्यवाद एवं बधाइयां।
श्री एन.एस. पिल्लै |
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मैं पिछले 15 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्था से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ हूँ तथा विभिन्न जिलों एवं रायपुर शहर में संस्था की गतिविधियों को देखा है। आध्यात्मिक क्षेत्र में यह अन्तर्राष्ट्रीय संस्था महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। दादा लेखराज की ‘ओम मण्डली संस्था ने अध्यात्म के साथ आस्था एवं समाज की कुरीतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।’ ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर रक्षासूत्र बांधकर भाईचारे के प्रचार-प्रसार करने का एक बहुत ही सुंदर कार्य करती है तथा विभिन्न गोष्ठियों के माध्यम से जीवन्त विषयों पर परिचर्चा कर देश की संस्कृति को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया जा रहा है। मैं इस संस्था के उज्जवल भविष्य की मंगलमय कामना करता हूँ।
श्री आर. एस. विश्वकर्मा, आई.ए.एस. |
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मेरी युवावस्था से ही भारतीय दर्शन के अध्ययन एवं प्रेक्टिस में गहन अभिरूचि रही है। मैं कई वर्षों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा प्रकाशित साहित्य का अध्ययन कर रहा हूँ तथा विश्व विद्यालय की आस्था एवं संस्कार टेलीविजन चैनलों के प्रसारणों को विशेष रूप से शिवानी बहन के कार्यक्रमों को देख रहा हूँ। विश्व विद्यालय के साहित्य, योग शिक्षा एवं टेलीविजन कार्यक्रमों से मेरे चिन्तन एवं जीवन-शैली में प्रभावी सकारात्मक परिवर्तन आया है। मेरी पहल पर इस संस्था से मेरे कई मित्र एवं स्नेहीजन भी लाभान्वित हुए हैं।
श्री शिवराज सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार |
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आज देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व को मूल्यों की शिक्षा देने की आवश्यकता है। मूल्यों के अभाव में ही विश्व में अशान्ति व अस्थिरता है। शिक्षा का अर्थ सिर्फ नौकरी प्राप्त करना नहीं है बल्कि जीवन जीने की कला भी सीखना है। प्राचीन समय में जो भी महापुरूष थे, उनका जीवन मूल्यों से सम्पन्न था। आज ब्रह्माकुमारी संस्था मूल्य और आध्यात्मिक शिक्षा द्वारा समाज, देश और विश्व को एक सूत्र में बांध सकती है।
डॉ. आर.एम. चंद्रशेखरन |
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I have been in association with Prajapita Brahma Kumari Ishwariya Vishwa Vidyalaya for the last 20 years. This organization is engaged in spreading spiritual knowledge and practice of ‘Rajyoga’ in simple and practical way which can be understood by everyone. The organization has its branches all over the country in India and also in more than 135 countries all over the world and has millions of followers. I hope the organization will continue to serve the people and the society through their valuable teachings and spiritual practice in creating a just and peaceful world.
D.N. Gupta, IAS Special Secretary |
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बह्माकुमारीज मे सतयुग की स्थापना हो रही है । यहाँ दिया जा रहा ज्ञान मनुष्य के लिए अत्यन्त जरूरी है। यहां का कार्य पद्धति जिस तरह से परमात्मा के नि्र्दशन मे हो रही है, वह अपने आप में अदभुत है। बाबा आकर दादा के माध्यम से ज्ञान आर दिशा देते है, यह महसूस होता है। परमात्मा से जुडने का मुझे महान अवसर मिला है। इससे ही विश्व का कल्याण होगा और एक दिन जरूर निराशा के बादल छटेंगे। वर्तमान समय इस ज्ञान का अपने जीवन में धारण करने का आवश्यकता है।
To be very frank, I initially evaded the Brahma Kumaris, for I did not know anything about them, and that was very long ago. But as soon as I learnt what they were working for, I felt enamoured of them. Today, I find a lot of stress, violence and fear in the world. But I feel that their spiritual smiles can dispel gloom and their ‘Om Shanti’ mantra can defuse even the most powerful nuclear bomb. स्वामी चक्रपाणि, |
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ब्रह्माकुमारी संस्था परमात्मा शिव का चैतन्य स्वरूप है। यहां की शिक्षाओं का आत्मसात करके हम अपने जीवन में परमात्मा के दिव्य गुणों का अनुभव कर सकते है। इस विश्व विद्यालय में किसी विशष समुदाय का लोकाचार या दर्शन शैली नहीं सिखाई जाती परन्तु मानव का सहीअर्थो में चरित्र निर्माण किया जाता है जिसका वर्तमान समय में सर्वाधिक जरूरत है। मुझे लगता है कि मै अब यहां लगातार आकर इस निर्माण में अपना सहयोग दें और अपना स्वरूप भी ऐसा ही बनाऊ। आत्मा की पवित्रता एवं सरलता का जीवन में धारण कर हम अपना स्वरूप भी परमात्मा जैसा बना सकते है। यहां स्पष्ट रूप से आत्मा के ज्ञान की व्याख्या की जाती है। संस्थान द्वारा नैतिक मूल्यों के संचार का जो कार्य किया जा रहा है वह अत्यन्त सराहनीय और समाज क लिए उपयोगी कार्य है । आज समाज क लिए यह ज्ञान बहत ही आवश्यक है ।
जगद् गरू शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती |
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आज मानव जाति को आध्यात्मिकता की आवश्यकता है। आध्यात्मिकता द्वारा ही मूल्यों को पुनर्स्थापित किया जा सकता है। वर्तमान समय में लोगों की जीवन-शैली इतनी बदल गई है कि वे आंतरिक भावनाओें को दबाते हुए मुस्कराने का स्वांग मात्र रचते हैं। ऐसे लोगों को आध्यात्मिकता ही जीवन का आदर्श समझाएगी। ब्रह्माकुमारी॰ज संस्था में लाखों भाई-बहनें एकजुट होकर ईश्वरीय सेवाओं में सहयोग कर रहे हैं। यहाँ आपसी प्यार, स्नेह एवं विश्वास है। पूरे विश्व में यह एकमात्र ऐसा विद्यालय है जो आध्यात्मिकता को अपने जीवन में अपना रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह संस्था सफलतापूर्वक निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
श्रीमद् महाराज निरंजना जगद्गुरू श्री मल्लिकार्जुन मुरूग्राजेंद्र महास्वामी |
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देश में अनेक विश्व विद्यालय ऐसे हैं जो सिर्फ डिग्रियां प्रदान करते हैं लेकिन माउण्ट आबू का यह ईश्वरीय विश्व विद्यालय ही एकमात्र संस्था है जो त्याग की नींव पर आधारित है तथा आध्यात्मिकता द्वारा नैतिकता और मानव सेवा की शिक्षा देती है। बहुत कम समय में इस संस्था ने लाखों लोगों को अपना बनाया है और कई देशों में अपनी शाखाएं खोली हैं। इसके लिए मैं संस्था का बहुत-बहुत सम्मान करता हूँ। यह संस्था सतत् रूप से आगे बढ़ती रहे, ऐसी मैं शुभभावना व्यक्त करता हूँ।
जगद्गुरू श्री श्री श्री सिद्धलिंग स्वामी |
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आज संसार में मानव समाज अपने लक्ष्य को भूल गया है। उसे यह ज्ञान नहीं है कि यह मनुष्य शरीर किसलिए मिला है? इसे प्राप्त करके क्या करना चाहिए और कब तक हमारा यह मनुष्य जीवन हमारे हाथ में है? काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार जैसे विकार मनुष्य को जीवन जीने में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। इस संस्थान द्वारा मनुष्यात्माओं को जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है। यह बहुत ही अच्छा प्रयास है। आज हमारे पुण्य कर्म और श्रेष्ठ भाग्य का ही फल है जो हम ब्रह्माकुमारी संस्था के इस पवित्र स्थान में पहुँचे हैं। संस्था द्वारा जो भारतवर्ष के सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को फिर से जीवंत करने की कोशिश की जा रही है, यह सर्वोत्तम कार्य है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा विश्व में परमात्मा का दिव्य संदेश एवं सुख, शान्ति का पैगाम दिया जा रहा है। इस अवसर को हम न भूले, न चूकें।
स्वामी रामानंद जी आचार्य |
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जीवन की यात्रा के तीन दोस्त है- शरीर, मन एवं आत्मा। माँ मुझे शरीर के लिए भोजन देती है लेकिन मन के लिए क्या,कोई मुझे समझाता नहीं था? मन के लिए भोजन भजन है और आत्मा के लिए ध्यान। इस तरह शरीर के लिए भोजन, मन के लिए भजन और आत्मा के लिए ध्यान आवश्यक है। ध्यान नहीं होगा तो नया संसार, नया स्वप्न साकार नहीं हो सकता है।
स्वामी समर्पणानंदगिरी जी महाराज |
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ब्रह्माकुमारी संस्था पिछले 75 वर्षों से सभी जाति, मत एवं पंथ के लोगों को आध्यात्मिक जीवन जीने का बहुत अच्छा प्रयास करा रही है। यदि हम सभी अपने जीवन में आध्यात्मिकता को अपना लें तो दुर्गुण, दुराचार एवं भ्रष्टाचार को दुनिया से मिटा सकते हैं। आध्यात्मिकता के अभाव से ही दुर्गुणों का प्रादुर्भाव होता है इसलिए आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करना अत्यंत आवश्यक है। ईश्वरीय ज्ञान से हमें शान्ति मिलती है और आत्म-विश्वास जागृत होता है जिससे हम सुख का अनुभव करने लगते हैं इसलिए पवित्र जीवन अपनाना आवश्यक है। ब्रह्माकुमारी संस्था घर-घर को स्वर्ग बनाने का सर्वोत्तम कार्य कर रही है। इससे हमारे गाँव, तहसील, राज्य और देश स्वर्ग के समान होने में कोई संदेह नहीं है।
सिद्धाराम महास्वामी |
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ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने 75 वर्षों के अंदर पूरे विश्व में आध्यात्मिक ज्ञान फैलाया है। विश्व विद्यालय ने बताया है कि हम सब एक पिता की संतान है। सभी शान्ति, प्रेम एवं भाईचारे से रहें। जब तक मनुष्य स्वयं के स्वरूप, अध्यात्म का चिन्तन एवं अपने जन्म का मर्म नहीं समझेगा तब तक उनको सच्ची शान्ति व सुख का अनुभव नहीR हो सकता है। यह विश्व विद्यालय सिर्फ आध्यात्मिक ज्ञान की शिक्षा ही नहीं देता बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक, नैतिक एवं चारित्रिक मूल्यों को जागृत करने की भी शिक्षा देता है। ब्रह्माकुमारी॰ज का आध्यात्मिक शिक्षा एवं सहज राजयोग सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।
श्रीमत गुरूसिंग धामा स्वामी जी |
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हम सभी एक परमपिता परमात्मा की संतान है। इस संसार में सूर्य भी एक और चंद्रमा भी एक है तथा हम प्रत्येक समय एक-दूसरे का साथ निभाते हैं तो फिर मनुष्यों का आपस में बंटवारा क्यों हो गया है। इसका समाधान हमें इस महान संस्था में मिल जाएगा। जिसका संचालन स्वयं परमात्मा कर रहे हैं जो 75 वर्षों से सफलतापूर्वक विश्व शान्ति, एकता एवं सद्भावना की अनोखी मिसाल प्रस्तुत की है। इस संस्था के निःस्वार्थ रूप से किए जा रहे कार्यों में हम सभी संत-महात्माएं भी पूर्ण रूप से सहयोग करेंगे और संस्था को आगे बढ़ाते रहेंगे।
शकराचार्य सिंद्धेश्वरानंद भारती स्वामी |
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वर्तमान समय विश्व की दशा को देखत हुऐ परिवर्तन आवश्यक है वयोंकि मनुष्यात्मांए अपनी प्राचीन संस्वãति से विमुख हो रही है जिससे पुरी दुनिया में भ्रष्टाचार, अनाचार एवं दुराचार बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे समय में हिंसक प्रवãत्तियों को केवल ब्रह्माकुमारी संस्था ही रोक सकती है। ब्रह्माकुमारी संस्था पुरी दुनिया में विश्व बंधुत्व एवं सदभावना का स्थापना में अतुलनीय योगदान दिया है। संस्थान का सफलतापुर्वक 75 वर्ष पूर्ण करना एक बहुत बडी उपलब्धि है। वर्तमान समय पुरी दुनिया की निगाहे भारत की ओर है। ब्रह्माकुमारीज ने पुरे विश्व को परमात्मा का दिव्य संदेश दिया है। ‘एक परमात्मा, विश्व एक परिवार’ की भावना से संसार में एकता और भाई चारे की भावना स्थापित होगी। यह संस्था अवश्य ही अपने कार्य में सफल होगी।
जगदगरू चंद्रशेखरा शिवयोगी राजेंद्र महास्वामी |
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ब्रह्माकुमारी॰ज माउण्ट आबू साधकों की साधना स्थली है। यहाँ के लोगों की तपस्या को देखकर हमारे अंदर का मैं-पन समाप्त हो गया है। मेरी अंतर्चेतना में यहाँ के शब्द घूम रहे हैं। संत-महात्माएं आदेश देते हैं, उपदेश देते हैं लेकिन ब्रह्माकुमारियां जीवन का उद्देश्य क्या है, वो सबको बता रही हैं। यह संस्था दुनिया में व्याप्त अज्ञान रूपी अंधेरे को मिटाकर प्रकाश की किरण की ओर लोगों को उन्मुक्त कर रही है। ‘एक परमात्मा, विश्व एक परिवार’ का आधार पवित्रता, शान्ति और प्रेम है। ब्रह्माकुमारी॰ज में किसी भी जाति, धर्म, भाषा, देश, कुल व खानदान की दीवार नहीं है। यहाँ सबकी एक भाषा है जो ‘एक आत्मा, एक परमात्मा’ के आधार पर परिवार बनाकर पूरे विश्व में प्रेम की बरसात कर रही है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप अपने श्रेष्ठ कार्य में सफल होंगे क्योंकि आपके पास विचार और संगठन है। संगठन ही आंदोलन का रूप लेता है। विचार, संगठन, आंदोलन, फिर आंदोलन प्रभाव डालता है। प्रभाव डालकर एक रचनात्मक कार्य करता है। आज पूरी दुनिया में अज्ञान अंधेरे के बादल छाये हुए हैं, उन्हें दूर करने में यह संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हम सब इनके सहभागी हैं।
स्वामी ब्रह्मदेव जी |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार, ब्रह्माकुमारियों की तपस्या और दादी जी की वात्सल्यमयी प्रतिमा, पूर्वसंस्थापक, दादा जी के तप का सारा बल जब यहां लोगों को मिलता है तो मार्ग की कठिनाई आप भूल जाते है। इसलिए म§झे लग रहा है कि अध्यात्म का सुख निश्चित रूप से बहुत बडी है।
स्वामी सत्यामत्रानंदगिरी जी |
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दादी प्रकाशमणि जी का जो प्रयास है, मैं उसकी सराहना करता हूँ और जितने धर्माचार्य यहाँ आये हैं उनके मुख से इस विश्व विद्यालय की सराहना ही सुनने को मिली है। मैं संस्था द्वारा मानव कल्याण के लिए की जा रही निःस्वार्थ सेवाओं की प्रशंसा करता हूँ और विश्वास रखता हूँ कि यह संस्था `दिन दूनी, रात चौगुनी’ वृद्धि करती रहे। संस्था की सेवाओं को देखते हुए मैं तन-मन-धन से सहयोग दूंगा।
स्वामी श्री 108 महामण्डलेश्वर महन्त दर्शन सिंह जी त्यागमूर्ति |
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प्रजापिता बह्मा अपना निर्णय विवेक-बुद्धि द्वारा करते थे। जब एक बार व अपना निर्णय कर लेते थे तो फिर दुनिया की कोई भी शक्ति उनको अपने पथ पर डिगा नही सकता था। चाहे काई उनकी निंदा अथवा स्तुति करे परन्तु उन्होंने जो कदम उठाया होता हे वह पीछे नहीं हटता। विषम परिस्थितियों में भी बह्मा बाबा ने जो व्यक्तिगत साधना की और आध्यात्त्मिक ज्ञान दिया, उन्होंने उस आध्यात्त्मिकता को जन साधारण के लिए खोल दिया I आज पूरी दुनिया को स्वर्ग बनाने के लिये ब्रह्माकुमार कुमारियों ने अपने जीवन को ईश्वरिय सेवा में समर्पित कर दिया है I यदि सही मायने में गीता के निष्काम कर्मयोगी की शिक्षा किसी ने उतारी है तो वे ईश्वरिय विश्व विद्यालय के ब्रह्माकुमार कुमारियां ही है I आध्यात्मिकता का भी यही लक्ष्य है की सार विश्व एक परिवार है और इसी कल्पना को साकार करने के लिए यह विश्व विद्यालय अथक प्रयास कर रहा है।
इस ईश्वरिय विश्व विद्यालय में सभी प्रकार के ईलाज उपलब्ध हैं। सम्पूर्ण विश्व को सभी प्रकार का करंट देने वाली यह संस्था एक पावर हाउस की तरह है। स्थूल शरीर के ईलाज हेतु ग्लोबल हॉस्पिटल और सूक्ष्म शरीर के ईलाज हेतु ज्ञान-योग जैसा सत्संग यहाँ प्रतिदिन उपलब्ध है। यह अद्भुत और अति उच्च स्तर का विद्यालय ही नहीं बल्कि मानवीयकरण का अस्पताल भी है। महामण्डलेश्वर स्वामी हंस प्रकाश जी |
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मुझे लगने लगा है कि मैं ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय का सदस्य हूँ क्योंकि यहाँ मैंने पाया कि भारतीय संस्कृति तथा विश्व-नवनिर्माण का सर्वोत्तम कार्य आरम्भ हो गया है। ऐसा स्व-शासन, अनुशासन, भाईचारे, धीरज और आत्मिक बल हमने आज तक किसी भी स्थान पर नहीं देखा है। यह वास्तविक रूप में एक विश्व विद्यालय है।
स्वामी निर्भयानन्द सरस्वती |
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परमात्मा निराकार है, उनसे ध्यान लगाने से हमारे अंदर शक्ति आती है जिससे हम स्वतः ही बुराइयों से बच जाते हैं। यहाँ का संचालन बहुत अच्छा है। यह संस्था निरंतर उन्नति करती रहे, ऐसी मेरी शुभकामना है।
संत कहन सिंह |
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He declared that God of the Gita was Incorporeal . He prescribed three practices for leadingthe righteous life: taking care of one’s character, being careful about food, and treating everyone with love and respect. This advice, given to him years ago by Brahma Baba, the founder of Brahma Kumaris, has stood him in good stead.
Mahamandleshwar Swami Sarvanand Saraswati |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में मुझे तीन दिनों में इतने अच्छे अनुभव प्राप्त हुए हैं जिन्हें शब्दों में वर्णन करना अत्यन्त कठिन हो रहा है। यहाँ चहुं ओर व्याप्त एकता, पवित्रता और स्वच्छता को देखकर महसूस होता है कि यह कार्य किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि किसी अलौकिक शक्ति का है जो अपनी शक्तियों को दादी जानकी के माध्यम से चारों ओर फैला रही है। मुझे अपनी खोई हुई माता दादी जानकी जी के रूप में वापस मिल गई है। मैं यहाँ से जाकर इस वातावरण का प्रसार-प्रचार करूंगा क्योंकि सभी को इसका लाभ हो, ऐसी भावना रखता हूँ I
श्री श्री शिवानंद स्वामी जी |
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मैने यहां आकर यह अनुभव किया है कि ब्रह्मा बाबा ने दादियों और उनके सान्निध्य में रहने वाले सभी ब्रह्माकुमार भाई-बहनो को अपनी शवित द्वारा इतना शान्ति प्रदान की है जो सभी ने अपने जीवन को ईश्वरीय सेवार्थ में समार्पीत कर दिया है। मै बहुत आश्रमों और सम्प्रदायों में जाकर घुमा है, वहां की गतिवधियों को देखा है परन्तु ऐसी एकता, पे्रम, बंधुत्व भाव, शांत स्वभाव, हार्षीतमुख चेहरा, अत्यत श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से सभी आत्माओं की सेवा में जीवन को समार्पीत करने वाले अन्य किसी भी स्थान पर नही देखा। उन्ही की शवित का प्रभाव है जो भारत के कोने-कोने में तथा विश्व के 137 देशों में संस्था का विस्तार हुआ है। ब्रह्मा बाबा जिस कुटिया में बैठते थे, जब हम वहाँ जाकर ध्यान में बैठे तो बाबा को देखते-देखते ही ऐसा हुआ कि मैं अपने आपको ही भूल गया। मेरे साथ आए लोग बाहर जाकर गाड़ी में बैठ गए और मुझे पता ही नहीं चला। जैसे कि मुझे समाधि लग गई है। बाबा की शक्ति मैंने स्वयं यहाँ अनुभव की।
विद्यावाचस्पति सहजानंद स्वामी जी |
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ब्रह्माकुमारी संस्था की जो श्री लक्ष्मी और श्री नारायण बनाने की योजना है, उसे सफल करने के लिए सभी को इस मंगलकारी कार्य में धर्म और नैतिकता को आचरण में लाकर सहयोग देना होगा। यदि धर्म का सही रीति से पालन किया जाए और नैतिकता अच्छी हो तो कोई भी धर्म ऐसा नहीं होगा जो परमात्मा से वंचित रखेगा। विगत 75 वर्ष से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पूरे संसार को परमात्मा का सच्चा मार्ग बता रहा है, यह कार्य बहुत सराहनीय है।
ज्ञानी अमरजीत सिंह, नान्देड |
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ऐसा प्यार दिल में जागृत हो जो हम दूसरों के विकास के लिए हाथ बढ़ायें, इन्हीR नियमों को यदि प्रत्येक मनुष्य अंगीकार करें तो हमारे इलाके, देश और विश्व में परिवर्तन आ ही जाएगा।
डॉ. स्वामी प्रेमानन्द सरस्वती जी |
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ब्रह्माकुमारी॰ज के पवित्र-पावन स्थान से हम सभी अपने श्रेष्ठ वायब्रेशन्स पूरे विश्व में सुख, शान्ति व भ्रातृत्व भाव का मार्ग प्रशस्त करने के लिए करें, जैसे ब्रह्मा बाबा ने सारे विश्व को यहाँ से ही श्रेष्ठ वायब्रेशन्स दिये। कलियुग का समापन इस संगमयुग से आरम्भ हो रहा है तो क्यों न हम भी नए युग में सभी संत-सम्प्रदाय एक साथ मिलकर इस कार्य में सहभागी बनें। यदि हम सब एक हो जाएं तो निश्चित रूप से हम अपने देश को `विश्व गुरू बना सकते हैं। यह सहज योग जो सर्व प्राप्तियां कराने वाला हैं, उसे सारे’ विश्व में इसी दिव्य स्थान से फैलाएं तो अच्छा होगा।
स्वामी दिव्यानंद योगीराज |
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ब्रह्माकुमारी संस्था के पावन आनंदमय आंगन में आप सभी आध्यात्मिक महान विभूतियों को बैठे देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। हम सभी विश्व में फैल रही भयावहता, अधर्म और असत्य के खिलाफ कार्य करने के लिए संगठित हुए हैं। इन सभी समस्याओं का निवारण करने के लिए मार्गदर्शन, संकेत, निर्देश व प्रेरणाएं इस अलौकिक स्थल से प्राप्त होती महसूस हो रही हैं। जहाँ दादा, दादी और दीदियों का अनन्य स्नेह प्राप्त हो वहाँ कोई भी कार्य दुष्कर नहीं है। शास्त्रों में वर्णित स्वर्ग को पुनः इस धरा पर उतारना है। स्वर्ग में वर्णित उस सुख व आनंद के सागर का अनुभव हम सबको अभी यहाँ से हो रहा है।
स्वामी देवानंद जी महाराज |
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यहां सभी दादियों के बीच अलौकिक सुख की अनुभूति हुई। ब्रह्मा बाबा का परमपिता परमात्मा से प्रेम का सम्बन्ध था। जो प्रेम करना जानता है उसे अपने जीवन को सुधारने और कुछ कहने की कोई आवश्यकता नही होती । आप सभी का विश्वास पक्का है, बाबा के साथ सम्बन्ध पक्का है और आप सभी का समर्पण भाव हम देख ही रहे है। यहाँ पे्रम का सागर दिखाई देता है। मैं जब शान्ति स्तम्भ पर खडा था तो मेरी आँखे नम हो गई। जो चीज इतनी गहरी चली जाए तो फिर उसे शब्दो में व्यक्त करना व अनुभव सुनाना सम्भव नही होता।
आचार्य देवेन्द्र डोंगरे |
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ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा परमपिता परमात्मा सबका उद्धार करने के लिए `शान्ति’ का संदेश दे रहे हैं जो हम सभी के लिए गौरव की बात है। प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि विश्व शान्ति की स्थापना में हमारा क्या योगदान है और हम क्या योगदान दे सकते हैं? हम सभी को ब्रह्माकुमारी संस्था में आकर शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए जिससे कि हम सभी का जीवन पवित्र बन जाये।
डॉ. शांत सिरा जी महास्वामी |
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मैं यहाँ पहली बार आया हूँ। यहाँ आने के बाद काफी सुकून पाया। यहाँ पर सभी आत्माओं के परमात्मा एक हैं जिसे राजयोग द्वारा याद करने की बहुत सुंदर विधि सिखाई गई जिसका बहुत अच्छा प्रभाव हम पर हुआ। अल्लाह से लव लगाने की जो राजयोग की विधि है उससे गहरी अनुभूति प्राप्त हुई। इंसान को अमल कैसे करना चाहिए, उसकी कृति कैसी होनी चाहिए, इस बात पर भी यहाँ बहुत बल दिया गया। बड़ी खुशी हुई कि यहाँ `वसुधैव कुटुम्बकम्’ की बात को प्रेक्टिकल आचरण में लाया जा रहा है। सभी ने कहा कि आप अपने घर में आये हो तो बहुत खुशी हुई। इधर से जाने के पश्चात् यहाँ का जो दिव्य संदेश है, उसे अपने साथियों तक पहुँचाउंगा।
इब्राहिम सुतार साहब |
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यहाँ ब्रह्माकुमारी॰ज, आबू पर्वत पर आने की बहुत दिनों से इच्छा थी। यहाँ पर आकर बहुत आनंद महसूस कर रहा हूँ। यह जगह ऐसे चुम्बक के समान है जो सारी दुनिया के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही है। सभी को यहाँ एक अलौकिक खिंचाव महसूस हो रहा है। सारी दुनिया में शान्ति का मंत्र सैटेलाइट के रूप में प्रसारित हो रहा है। दुनिया में शान्ति की बहुत अधिक आवश्यकता है। धर्म का असली अर्थ यहाँ प्राप्त हो रहा है। इस सत्य धर्म व शान्ति का संदेश लेकर चारों ओर फैलाने की जरूरत है ताकि जाति-पाति व धर्म के नाम पर बहने वाले खून को रोका जा सके। यहाँ पर विज्ञान भी है तो सुज्ञान भी। यह विद्यालय दिव्यता का विश्व विद्यालय है। दिव्यता का अर्थ है- करूणा, विनय, क्षमता, सत्य, शान्ति व अहिंसा। भारत को `सुपर पावर’ बनाने के लिए जात-पात, वर्णभेद और अंधश्रद्धा को मिटाकर एक ही परमात्मा व एक ही धर्म का संदेश यहाँ से लेकर प्रसार करने की आवश्यकता है। सभी भाषाओं में अनुवाद करके सारी दुनिया में यह ईश्वरीय संदेश, शान्ति संदेश, पवित्रता का संदेश और विश्व सेवा का संदेश देना है। यहाँ के भाई-बहनों ने बहुत प्यार से हमारी सेवा की है।
स्वामी बसव कल्याण |
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मैंने ब्रह्मा बाबा के बारे में अध्ययन किया कि उनकी दृष्टि गहरी थी। वे विश्व का प्रथम आत्मा था जिसने मातृशक्ति का सम्मान किया और उसने तत्व प्रदान किया। ` मातृ देवो भव’ फिर `पितã देवोभव’ कहा जाता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते है लेकिन यह बात प्रक्टिकल रूप में ब्रह्मा बाबा ने कर दिखाया। माताओं ने भी सिद्ध करके दिखाया कि उनमे अपार क्षमता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि नारी आध्यात्मिक जगत में क्रांति ला सकती है। आज इस प्रांगण में आकर जब बहनो से मिलता हूं तो पाता हूं कि उनकी दृष्टि निर्मल व र्नीदोष है। इन बहनां की अन्तर्मुखता और ध्यानस्थ ऊर्जा से पूरा आश्रम ऊर्जान्वित है और जब हम यहां से जाएगें तो निश्चित ही यह संदेश पूरे जगत में फैलाएंगे।
डॉ. स्वामी राघवानन्द जी महाराज |
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यहाँ ब्रह्माकुमारी॰ज में आकर सृष्टि रचता की सर्वोत्तम रचना के दर्शन हो गए। मैंने पंचतत्वों के शरीर में दादा को तो नहीं देखा लेकिन ग्रंथ के तीसरे नेत्र के अध्ययन के बल पर यह जरूर कहूँगा कि संतत्व वहाँ ही खड़ा होता है, जहाँ अव्यक्त होता है।
स्वामी माधवानंद |
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Let the blessings of the Lord be upon all of us, and let there be peace in the creation. I am happy to write about my experience with Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya. I came to know about this beautiful organization in 1978, during my college days. Over the years, I have participated in many of their inspiring programmes on various occasions. It is individuals who constitute families and ultimately society. The transformation of individuals leads to change in the family and finally to the change in the creation. Peace, love, and harmony are needed to make this world a beautiful place to live. Attaining inner peace through the practice of meditation, harmony through living a practical spiritual life, and having a positive attitude to life through mutual love and cooperation are needed for this noble purpose. Through its numerous branches all over the world, Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya has been trying to fulfill this noble goal with its sincere and committed service. This organization’s contribution to humanity is of utmost importance and will continue to help many on their spiritual path. I wish this organization success in all its endeavors.
Paramahamsa Prajnanananda |
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मैं यहाँ ब्रह्माकुमारी॰ज, आबू पर्वत पर तीन-चार बार आया हूँ। मुझे प्रत्येक बार कुछ नया अनुभव हुआ है, नई प्रक्रिया हुई है। यहाँ शक्ति का भंडार है। यहाँ शान्ति, प्रेम और सहनशीलता की शक्ति है। यह शान्ति दुनिया के कोने-कोने में जा रही है। हमें यह अनुभव हुआ है कि हमारा स्वरूप शान्ति, प्रेम और आनंद स्वरूप है। इसे हम यहाँ से लेकर जा सकते हैं। मैं आपसे प्रार्थना करूंगा कि प्रत्येक वर्ष हम संतों व साधुओं को बुलाकर मेडीटेशन का कार्यक्रम रखें और हमें प्रेम से ज्ञान-योग और ईश्वरीय शिक्षा देकर गाईड करें। ज्ञान होने पर कमियों को दूर किया जा सकता है। मैंने इस आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ने के पश्चात् जीवन में आए परिवर्तन को देखा है।
स्वामी सेवानंद जी महाराज |
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यहां निःस्वार्थ सेवा व सम्मान से कार्य हो रहा है उससे चारो ओर शान्ति ही शान्ति दिखाई दे रही है । हम एक-दुसरे से इसी प्रकार भाई चारे व पे्रमपूर्ण व्यवहार करे शान्ति प्राप्त कर सकते है। नम्रता पूर्ण व्यवहार व सत्कार का भाव अनुकरणीय है। यहां जो शान्ति का पुंज बिखरा दिखाई देता है, वह सच्ची मानवता का है। इस स्थान को देखकर महसुस होता है कि मर्यादापूर्ण आचरण से हर पल और हर जगह पर शान्ति आ सकती है।
श्री श्री 1008 स्वामी महानद जी |
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बह्माकुमारीज़ में दिया जा रहा ज्ञान समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी है । यहाँ के ज्ञान ने लाखों लोगों का जीवन बदला है। ज्ञान से इंसान के विचारों में सात्विकता आति है, उसकी सोच का नजरिया बदल जाता है और वह आछाई के मार्ग पर अग्र्सर होने लगता है | उसके जीवन से अवगुण दूर होने लगते हैं | और सद्गुण आने लगते हैं I सभी आत्माओं का परमपिता परमात्मा एक है और हम सभी उसकी संतान हैं । यह कोई अंधविश्वास की बात नही है । बह्माकुमारीज़ जिस सत्यता के साथ आगे बढ़ रही है, वही एक दिन अवश्य ही अपने मकसद में सफल होगी I संत दर्शन सिंह |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की दादीयां ईश्वरीय ज्ञान को जन-जन तक फेला रही हैं। यह ज्ञान लोगों में सद्भावना, शांति और प्रेम का प्रवाह बहा रहा है | इससे लागों के जीवन में बदलाव आ रहा है | अनेक जन्मों के श्रेष्ठ कर्मों का पण्य फल है जो सरस्वती स्वरूपा ज्ञान-गंगाओं के मधुर मुख से यह ज्ञान सुनने का अवसर मिला | संस्था अपने उदेश्य में सफल हो, यही मेरी शुभकामना है।
महंत ज्ञानदेव सिंह, हरिद्वार |
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आज प्रत्येक युवा को मूल्य शिक्षा और श्रेष्ठ संस्कार देने की आवश्यकता है। वर्तमान युवाओं के अंदर ज्ञान है परन्तु आध्यात्मिक मूल्यों एवं आदर्श ज्ञान का अभाव होता जा रहा है। इससे संस्कारविहीन मनुष्य का जीवन एक पशु के समान हो जाता है। मूल्य आधारित शिक्षा से युवाओं में श्रेष्ठ संस्कार बनेंगे। ब्रह्माकुमारी॰ज संस्था का ज्ञान सभी धर्मों व सम्प्रदायों से भिन्न है। आध्यात्मिकता का पाठ हर मनुष्य के लिए आवश्यक है इसलिए हमने ब्रह्माकुमारी संस्था के साथ एम.ओ.यू. किया है।
प्रो. एम.जी. कृष्णनन |
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अदम्य साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और ऊंचे लक्ष्य लेकर कोई भी कार्य आरम्भ किया जाए तो वह बहुत आगे जाता है। ब्रह्माकुमारी संस्था का जो विस्तार हुआ है, वह तो कल्पना से परे है। जिस प्रकार लोगों ने संस्था के विचारों, कार्य-कलापों और मान्यताओं को अपनाया है, मैं समझता हूँ कि नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों के विकास में यह सर्वश्रेष्ठ कदम है। शिक्षा के क्षेत्र में जो कमी आई है, उसकी पूर्ति करने का प्रयास ब्रह्माकुमारी॰ज कर रही है। यहाँ का कार्य बहुत ही सराहनीय और अनुकरणीय है। जिस तन्मयता, लगन, प्रबंधन और गंभीरता से यहाँ के सारे कार्यकलाप हो रहे हैं, वह अद्भुत है। इसमें केवल विस्तार ही नहीं हो रहा है अपितु समाज की विकृतियां, बुराइयां और असामाजिक चुनौतियां भी समाप्त हो रही हैं। यह विश्व विद्यालय इन गंभीर चुनौतियों के प्रति विचारशील हैं और इसके उन्मूलन के लिए कृत संकल्पित हैं।
प्रो. आदित्य शास्त्री |
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Brahma Kumaris organization is a unique university that enhances and develops the human potential. It imparts education for life, not for jobs. I wish it to grow day by day and one day to celebrate its centenary.
Dr. H. Maheshappa |
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Our universities were producing very good doctors, engineers and other professionals, but not ideal human beings. Due to lack of values, such persons could not be happy in spite of the fact that they were both intelligent and industrious. As the future reins of the country are going to be in the hands of more and more youths, it is imperative to introduce values and spirituality in our education system. That is why my university has entered into an MoU with Prajapita Brahma Kumari Ishwariya Vishwa Vidhyalaya. I hope that this will supply the missing link in our education system.
Dr. R. Krishna Kumar |
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It is a great opportunity and a rare occasion to come at Brahma Kumaris Headquarters. I must admit that occasions like this do come but very rarely in one’s life. I consider this the rarest one in my life, to be in the midst of dedicated people, all pursuing one noble cause and that is to imrove the quality of life. Education is for life, it is not based simply on bookish knowledge, not merely believing in skills for earning a living. This doctrine is something that drives people together and I believe that is why we all are here.
Dr. S.N. Hegde |
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We have many Vice‐chancellors coming over here addressing this gathering. I was wondering how they could find time to come over here. Now I know the secret: they don’t get such a beautiful audience as they get here. An audience, a cross section of the nation, an audience of several languages, an audience calm at mind, totally dedicated to what is going on in the conference. We don’t find such an audience elsewhere. I feel honoured to address a gathering of such dimensions and qualities. As you walk in here, you find silence pervades the campus. People look at you with affection and esteem. That is a sort of mesmerism here. I find here an air of cleanliness, an air of serenity, sublimity, the supremacy of the soul. Nothing like as far as creed, the trifles.
Dr. B. Illango |
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Brahma Kumaris is the only organization that gives a systematic knowledge of soul and God. It is only through BK values of non‐violence and peace that his country, which at present is poor and under‐developed and crime‐infested, can attain true and substantial progress.
Mr. Gamzayev Ali Hasan Ali |
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In addition to the teachers, the technocrats and the saints are truely the builders of the nation. I am proud that the Brahma Kumaris University is playing an important role in establishing the Golden Age through God’s Wisdom
Dr. K.C. Singhal Vice‐Chancellor |
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I feel deeply energised after coming to this place. I wish my university also to emulate certain values which are being practised here. I feel overwhelmed by the spirit of co‐operation among the BK brothers and sisters who are managing the affairs of this big campus. The way of Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya is working for world peace and would entitle Indian to be known as Messengers of Peace. I am highly impressed very much with Rajyoga meditation as practised and taught by this institution.
Dr. Lakshman Chaturvedi |
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अन्नामलाई विश्वविद्यालय में ब्रह्माकुमारी॰ज के तकनीकी सहयोग से संचालित एम.बी.ए. कार्यक्रम की लॉचिंग करते हुए मुझे अत्यन्त प्रसन्नता हो रही है। मैं राजयोग शिक्षा एवं शोध संस्थान को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ क्योंकि इस संस्थान ने एम.बी.ए. पाठ्यक्रम को लागू करने का मन बनाया है। यह आध्यात्मिक शिक्षा आज की तारीख में अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से हम अपने जीवन में, परिवार तथा समाज में मूल्यों को स्थापित कर पाएंगे। यह संस्थान महान है जिसने हमें इस कोर्स को लागू करने का मौका दिया है। आज समाज में अनेक आडम्बर, कुप्रथाएं एवं आपसी मतभेद हैं। ऐसे समय पर संस्था द्वारा पूरे विश्व में शान्ति, एकता और भाईचारा लाने की कोशिश की जा रही है जो अत्यन्त ही सराहनीय है।
डॉ. एम. रामानाथन |
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आज विज्ञान एवं विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का व्यापक विकास हुआ है लेकिन व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में तनाव, दुःख और अशान्ति बढ़ी है। इससे सिद्ध है कि हमने अपने जीवन में कुछ खोया है और अपने श्रेष्ठ लक्ष्यों से विरक्त हुए हैं। ऐसे समय पर ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा मूल्यों की पुनर्स्थापना एवं पर्यावरण जागृति का कार्य बहुत ही सराहनीय और अनुकरणीय है।
प्रो. डी.के. बंदोपाध्याय |
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It is a matter of great pride for all of us that an institution of this stature has come forward to conduct such a high class conference. Education, as I conceive is not simply learning, reading and writing. But it is the overall development of an individual including the psychological development and spiritual betterment. Attainment of values makes us happy, contented and peaceful. We can experience silence of mind only if we think positively along the right direction. All of us have learnt the art of meditation for acquiring peace and silence during these three days. Organisations like the Brahma Kumaris can help our young generation. Our ultimate aim has to be human uplift through the blessings of the Almighty God.
Dr. B.P. Bhatnagar |
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It is the call of time that spiritual education must be introduced. The worldwide programmes conducted by Brahma Kumaris on ‘International Year for Culture of Peace,’ are of utmost import. Education is the major distinction that differentiates between human beings and animals. Prajapita Brahma Kumari Ishwariya Vishwa Vidyalaya aspires lovingly for a culture of peace, which can help humanity to shine with resplendent glory. It is time that we encourage education for peace, and protect and respect all human rights without exception.
Prof. Prem Kumar Sharda |
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ज्ञान सरोवर परिसर का आध्यात्मिक, शांतमय व शक्तिशाली वातावरण मन को सशक्त करता है। इस प्रकार के वातावरण से मानसिक सुषुप्त शक्तियां जागृत होती हैं जिससे मनुष्य के आत्म-निरीक्षण के द्वार खुलते हैं। भारत की विद्वता व अध्यात्म विश्व के लिए सहारा है। इसी आध्यात्मिक शक्ति का प्रकाश सारे संसार में फैल रहा है जिसके कारण ब्रह्माकुमारी संगठन द्वारा चलाया जा रहा `विश्व शान्ति’ का अभियान निःसंदेह इस पुनीत कार्य को सम्पन्न करने में सफल होगा।
डॉ. कमल सिंह |
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पाठ्यक्रम शिक्षा की आत्मा होती है। यदि हम शिक्षा में नैतिक शिक्षा को अनिवार्य कर देते हैं तो छात्र जब फील्ड में जाएगा तो अन्य शिक्षा के साथ इसे भी साथ ले जाएगा। नैतिक शिक्षा और अध्यात्म का ज्ञान भी उसके साथ रहेगा फिर वह जो भी कार्य करेगा, ज्ञान के अनुसार ही करेगा। नैतिक शिक्षा, अध्यात्म और मूल्यों को जब हम सिलेबस में लेते हैं तो विद्यार्था पढ़कर जब समाज का एक हिस्सा बनेगा तब उसके पास उचित निर्णय शक्ति और निर्भयता के आधार पर उस विद्या का कहीं न कहीं उपयोग करेगा। इससे वह स्वयं सफल होगा, परिवार खुशनुमा होगा और समाज को भी सुधारने में मदद करेगा। वर्तमान समय में जो हालात है उसमें सबसे अधिक मूल्य शिक्षा की आवश्यकता है। इस क्षेत्र में ब्रह्माकुमारी॰ज का योगदान अग्रणी है। श्री आशीष डोंगरे |
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संस्कार मूल्य परक होने चाहिए, उसके अभाव में बहुत नुकसान हो रहा है। लोग भौतिकवादी होते जा रहे हैं। आज जो शिक्षा दी जा रही है, उसमें मूल्यों का अभाव है जिसके कारण जीवन से मूल्य विलुप्त होते जा रहे हैं। ब्रह्माकुमारी संस्था की शिक्षा से निश्चित तौर पर सर्वांगीण विकास होगा। इसको देखते हुए कोटा विश्वविद्यालय और ईश्वरीय विश्व विद्यालय दोनों ने मिलकर पाठ्यक्रम चलाने की पहल की है। इससे अवश्य ही युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी और वे संस्कारित होंगे। आज बहुत आवश्यक है कि ऐसी शिक्षाओं को बढ़ावा दिया जाए।
प्रो॰ विनय कुमार पाठक |
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मानवीय सम्बन्धों को बनाने में वर्तमान शिक्षा आज असफल हो चुकी है क्योंकि इसमें कोई आध्यात्मिक शिक्षा नहीं है। आज शिक्षक भी वैसे ही कार्य करते हैं जिसमें उनका ग्रोथ हो। आज जितने भी शिक्षण संस्थान हैं, वे अध्यात्म से दूर है जिससे एज्युकेशन बि॰जनेस बन गया है। जो कहीR नहीR पढ़ाया जाता है वह ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में पढ़ाया जाता है। जब तक हम शिक्षा को अध्यात्म द्वारा मूल्य आधारित नहीR बनाते हैं, तब तक हम लोगों को वास्तविक शिक्षा नहीR दे पाएंगे।
डॉ. जतीन एच. सोनी |
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आज पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित शिक्षा का अध्ययन करके हम अध्यापक कहलाते हैं। हमारे गुरूकुलों में जो शिक्षा दी जाती थी, आज उसे खत्म कर दिया गया है। आज सारी शिक्षा अनुशासनहीन हो गई है। मैं यहाँ आकर बहुत खुश हूँ कि ब्रह्माकुमारी॰ज द्वारा मूल्यों की स्थापना की शिक्षा दी जा रही है। योग-विज्ञान के कारण ही आज भारत का विश्व में नाम है। हमारी युनिवर्सिटी में एक मेडीटेशन सेंटर बनाया गया है। आध्यात्मिक शिक्षा आज समय की मांग है और हमें इसे स्वीकार करना होगा।
प्रो. प्रेम कुमार घोसला |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के भरतपुर सेवाकेन्द्र का मैंने अवलोकन किया। यहाँ का वातावरण अत्यन्त शान्त, शुद्ध और शक्तिशाली है। सेवाकेन्द्र पर उपस्थित समर्पित भाई-बहनों ने मुझे अपने विश्व विद्यालय का संदेश अच्छी तरह से दिया। उन्होंने राजयोग के द्वारा शान्ति प्राप्त करने की विधि भी बताई। वर्तमान समय में हो रही ईश्वरीय सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। मैं संस्था के सभी भाई-बहनों को सम्पूर्ण मानवता तक परमात्मा का दिव्य संदेश पहुँचाने के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
प्रो. डॉ. के.डी. स्वामी |
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If spirituality touched even a corner of the hearts and souls of the men who are running the country, our India would grow tremendously. When we think of growth, values such as dedication, devotion, discipline and determination can be brought about only through silence. Silence, meditation and spirituality need to be incorporated into our current educational system. Meditation is something by which we can achieve growth of mind and peaceful life.
Prof. Niranjan Panda |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में वास्तविक शिक्षा दी जा रही है। यहां लोंगो को मूल्य जीवन जीने की कला सिखाई जात् है। नैतिक मूल्यों की शिक्षा व्यवहार से सिखाई जाती है। एक दिन यह विश्व विद्यालय पूरे विश्व में प्रख्यात हागी। आज की शिक्षा पद्धति बच्चों को एक आदर्श इंसान बनाने की जगह डिप्लोमा और डिग्री देने पर अधिक ध्यान दे रही है। वर्तमान शिक्षा हमारे जीवन में मात्र 5 प्रतिशत ही काम आती है। आज के समाज में नैतिक मूल्य एवं आध्यात्मिक शिक्षा की बेहद जरूरत है। विश्व में गिरते मूल्यों के पतन को हम मूल्य शिक्षा से ही बचा सकते हैं। इस अद्भुत विश्व विद्यालय में प्रत्येक भाई-बहन के चेहरों पर खुशी की चमक स्पष्ट देखी जा सकती है।
डॉ. संजय बियानी |
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One would think yesterday was good, today is bad, and tomorrow could be worse, the reason being the deterioration in value system in the society. In the context of this value crisis and this kind of a fear, Brahma Kumaris, through their social, educational, and spiritual activities, are trying to give a lead to this country and to the several other countries at the international level as to how society could be made a better place to live in.
Prof. N.S. Ramegowda |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के एक कार्यक्रम में जाने का मुझे सुअवसर प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर मैं उनके सिद्धान्तों, उपदेशों एवं संदेशों से अत्यन्त प्रभावित हुआ। आज यह ईश्वरीय विश्व विद्यालय मानव जीवन की श्रेष्ठता और सफलता से सम्बन्धित ज्ञान पूरे विश्व में आध्यात्मिक जागृति के संदेश के रूप में दे रहा है। निश्चय ही यह संस्था विश्व शान्ति के लिए अग्रणी कार्य कर रही है। मैं इस संस्था के प्रति नतमस्तक हूँ। डॉ. कृष्ण चंद रल्हान |
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I am glad to participate in the Platinum Jubilee Celebrations of this noblest organization, whose loving members are spreading peace in the whole world. I am basically a man of science, having a very critical outlook, but I can confidently say that I have seen here God with my own eyes. I have heard Him too. Baba’s drishti has transformed me. The inspiration not to work for money but for human service came to me from Dadi Janki ji. The whole organization is an epitome of purity in throughts, words and deeds.
Dr. G. Bhaktavathsalam |
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The Brahma Kumaris Headquarters, Mount Abu is a paradise on earth. This unique organization is imparting spiritual knowledge, which is very precious for inculcating divine values. It started as a sapling 75 years ago, and has now grown into a gigantic tree, spreading its branches in every nook and corner of the world.
Shri B.R. Nahar |
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मेरी आबू पर्वत की यात्रा जीवन की एक अद्भुत एवं अविस्मरणीय यादगार रही है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय में व्यतीत किया गया समय मेरे जीवन का सर्वोच्च क्षण है जो आज भी मनोमस्तिष्क में अमिट रूप से अंकित है। आबू पर्वत में स्थित पीस पार्क और ज्ञान सरोवर का आध्यात्मिक वातावरण अद्वितीय एवं स्वर्गिक सुख की अनुभूति कराता है। यहाँ दिनचर्या प्रातः 4-30 से शुरू होकर रात्रि 9-30 बजे तक चलती है। ज्ञान सरोवर परिसर में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम विशेष रूप से प्रशंसनीय हैं। यहाँ सभी टीचर्स बहनें भाषण भी देती हैं तो इतने मधुर स्वर में कि मानो कानों में रस वर्षा हो रही हो। यहाँ का गुरूमंत्र है- `कम बोलो, धीरे बोलो और मीठा बोलो’। आत्मा से परमपिता परमात्मा के दर्शन करने की यह सर्वोत्तम जगह है। यहाँ के प्रशासनिक कार्यों की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है तथा दादियों, दीदियों, टीचर्स एवं संस्था के प्रति दिल से सदैव आभारी एवं अभिभूत रहेंगे।
श्री आर.सी. मित्तल, |
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विगत 75 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्था पूरी दुनिया को यह बता रही है कि परमात्मा एक है और विश्व एक परिवार है। यह बहुत बड़ी बात है। संस्था के भाई-बहनों के प्रवचनों से मैं अत्यन्त प्रभावित हुई हूँ और काफी कुछ सीखी हूँ। इससे मैं यह अनुमान लगा सकती हूँ कि आप सभी का जीवन कितना शान्त और श्रेष्ठ होगा। यहाँ सुख, शान्ति और पवित्रता का असीम भण्डार है।
बहन प्रियंका चोपड़ा |
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जब हम अपनी दिनचर्या एवं कार्य-व्यवहार में व्यस्त होते हैं, तब उसके साथ कई समस्याएं एवं तनाव उत्पन्न होते हैं जिसे हम अपने स्तर पर सुलझाने का प्रयास करते हैं परन्तु वह मैनेज नहीं हो पाती है। मुझे ब्रह्माकुमारी संस्था का ज्ञान और यहाँ की कार्यशैली प्रत्येक समय मदद करती है। सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति एक-दूसरे के ही पूरक है। ब्रह्माकुमारी संस्थान में ज्ञान और परमात्म-मिलन की विधि सहज ही ईश्वरीय शक्ति की अनुभूति कराती है। ऐसा लगता है जैसे मन हमेशा इसमें डूबा रहे। मुझे जब भी समय मिलता है, मैं ईश्वर में स्वयं को लगाने का प्रयास करती हूँ।
बहन पूनम ढिल्लो |
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बचपन में जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो उस समय मेरे प्रिंसीपल क्रिश्चियन थे। वह स्कूली बच्चों को बुलाकर यही कहते थे कि जोर से बोलो- `ओम शान्ति’। आज मुझे उनकी याद आ गई। इस दुनिया में सबसे अधिक आवश्यकता `शान्ति’ की है। यदि हम प्रातःकाल अखबार खोलें तो उसमें कई प्रकार की घटनाओं का वर्णन होता है। मैं आप सभी से यही कहना चाहूंगा कि आप सदा `ओम शान्ति’ का महामंत्र अपने पास रखिये और दूसरों को भी बांटिये। इसी में ही सर्व का भला है।
भ्राता अक्षय कुमार |
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महिलाएं ही असली हीरोइन होती हैं। प्राचीन धार्मिक ग्रन्थों में नारी शक्ति का गायन दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती इत्यादि के रूप में है। प्रत्येक महिला के अंदर शक्ति विद्यमान होती हैं। वह जो चाहे, कर सकती है। परिवार, समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। मैं समझता हूँ कि ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनें महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श उदाहरण है।
भ्राता जैकी श्रॉफ |
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अधिकतर लोग अपनी सोच के आधार पर स्वंय को छोटा या बडा समझते है। इसका कारण है, `स्वंय को वास्तविक परिचय का ज्ञान न होना।’ ब्रह्माकुमारी संस्था की बहने सारे विश्व में शान्ति का संदेश फैला रही है। यदि विश्व में शान्ति की स्थापना करनी है तो पहले स्वंय को शान्त करना सीखना होगा। यहां की बहने शान्ति का जो मार्ग दिखा रही है, वह सर्वोत्तम मार्ग है।
भ्राता रितिक रोशन |
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फिल्मों की दुनिया की जिन्दगी बिल्कुल अलग होती है, लेकिन आत्मा की सच्ची प्यास अधूरी रहती है। टी.वी. में ब्रह्माकुमारी॰ज का कार्यक्रम देखा तो लगा कि इसमें कुछ सच्चाई जरूर है। जब संस्था के सम्पर्क में आया तो धीरे-धीरे तस्वीर साफ होने लगी और आज मैं एक अच्छी जिन्दगी व्यतीत कर रहा हूँ। यह सत्य है कि परमपिता परमात्मा शिव का इस धरा पर अवतरण हो चुका है। वे सहज राजयोग की शिक्षा देकर हम आत्माओं को पावन बना रहे हैं। इस मिलन के साक्षी लाखों ब्रह्माकुमार भाई-बहनें है जिन्होंने साक्षात् भगवान से मिलन मनाया है।
भ्राता सुरेश ओबेराय |
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The true education is not only to provide informaltion but also to inculcate wisdom among the students. And a person imbued with wisdom should be in a position to share love with others. I can tell personal anecdote about happiness. Dadi Janki ji, Chief of Brahma Kumaris, once asked me, “How are you?” I said, “I am O.K.” “But are you happy?” she said. I smiled back, which implied that I was not. I appreciates her idea that happiness lies within us.
Bro. Subhash Ghai |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में आना श्रेष्ठ भाग्य की बात है जिसके लिए मैं स्वयं को काफी भाग्यशाली समझता हूँ। मैं कई वर्षों से इस संस्था से जुड़ा हूँ। यहाँ की बहनें प्रतिवर्ष मुझे राखी बांधती हैं और कई कार्यक्रमों में बुलाती हैं। परमात्मा की कृपा से शुरू से ही मुझे आप सभी का प्यार और आशिर्वाद मिला है। हर पिता चाहता है कि उनका बेटा बड़ा होकर कुछ नाम कमाये या अच्छा कार्य करें। बाबा भी यही चाहते हैं कि दुनिया के सभी बच्चे सुख-शान्ति से जीवन व्यतीत करें और सदा खुश रहे। जब मैं अगली बार माउण्ट आबू आऊंगा तो मेरा पुत्र आदित्य भी साथ रहेगा।
भ्राता उदित नारायण, |
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There is no other organization like Brahma Kumaris and they have enlightened people all over the world with their simple spiritual approach. They remember one Incorporeal God, Shiva. I participate in the programmes of Brahma Kumaris whenever I am in India. They have a beautiful greeting ‘Om shanti’ which helps us to have the awareness of our original peaceful nature.
Bro. Bappi Lahiri |
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अल्लाह, खुदा, गाड व भगवान वास्तव में एक ही है। वह निराकार ज्योति है। पवित्र कुरान में एक लाख पैगम्बरो का वर्णन है जिन्होने समय-समय पर इस धरा पर अवतरित होकर मानव जाति को यह शिक्षा दी है कि परमात्मा एक है और वह ज्योति बिन्दु स्वरूप है। ब्रह्माकुमारी॰ज बहुत ही सरल ढंग से पूरे विश्व को यह शिक्षा दे रही है कि कैसे परमात्मा से अपना सीधा सम्बन्ध जोड़ें तथा उसकी इबादत करें जिससे मन को शान्ति व सुकून की अनुभूति हो।
भ्राता शाहबाज खान |
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मैं सन् 2013 में ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी थी। परमात्मा को ढूंढ़ने के लिए बहुत से मंदिरों के चक्कर लगाये, अनेक साधु-महात्माओं के शरण में भी गई। लेकिन कोई भी मुझे परमात्मा से नहीं मिला सका। परन्तु जबसे इस संस्था से जुड़ी हूँ, मेरा प्रतिदिन परमात्मा पिता से मिलन होता है। परमात्मा ने पहली ही मुलाकात में मुझे इतना प्यार दिया, मैं उस प्यार में ही खो गई। परमात्मा से मैंने सर्व सम्बन्ध जोड़ लिए। मैंने भगवान के साथ होली खेली। भगवान ने हमारे सारे प्रश्नों का जवाब `मुरली’ के माध्यम से दे दिया। अब मैं मानसिक रूप से बहुत ही मजबूत हो गई हूँ। भगवान इस धरा पर आ गया है।
बहन ग्रेसी सिंह |
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जो भी बच्चे फिल्मों की दुनिया में कदम रखेंगे, उनके जीवन में तरक्की के लिए राजयोग मेडीटेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और व्यक्तिगत विकास के लिए बहुत अच्छा साबित होगा। मेडीटेशन से आन्तरिक शक्ति में विकास होता है जो फिल्म इण्डस्ट्री के लोगों के लिए अति आवश्यक है।
बहन विद्या बालन |
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I have come to Mount Abu for the second time. I am greatly touched by the hospitality of Brahma Kumaris. Every guest is made to feel here that he or she is a VIP. This is a place where love and respect overflow. You can share these values with others only when you possess them in plenty. Only peace can expel terrrorism from the world. A smile increases your face value as well as it gives solace to those with whom you come in contact. I feel that this is a place which can remove stress and strain from modern life.
Smt. Varsha Usgaonkar |
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राजयोग परमात्मा के साथ सीधे सम्बन्ध जोड़ने का सर्वोत्तम साधन है। यह ईश्वरीय ज्ञान सरल, सुखमय, तनावमुक्त जीवन व्यतीत करने तथा परमात्म प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। ब्रह्माकुमारी॰ज द्वारा आत्मा-परमात्मा का जो सत्य ज्ञान दिया जाता है उसको जानने और समझने के बाद जीवन में स्वतः ही परिवर्तन आने लगता है।
बहन सौम्या टंडन |
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Mount Abu has gifted me with beautiful moments of peace. Though I got the opportunity to sing a number of songs of Baba in my life, it took me a long time to reach Mount Abu but was finally lucky enough to reach Baba’s home. I felt peace here that cannot be found anywhere else. Even in the midst of Shivratri festival, people were serving so peacefully. I saw the discipline of our age old traditions in this university. I was witness to not only the display of selfless service but also the qualities of love, simplicity and mercy of Brahma Kumars and Kumaris even at the end of this Iron Age and experience their loving touch of compassion. Bro. Padma Kumar |
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ब्रह्माकुमारी॰ज द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान बहुत ही गुह्य है। राजयोग के अभ्यास से अनेक लोगों के जीवन में परिवर्तन आया है। राजयोग से हमें स्वयं का निरीक्षण करने का अवसर मिलता है। यहाँ दिया जाने वाला आत्मा-परमात्मा का ज्ञान वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है। इस ज्ञान को जीवन में धारण करने के बाद मेरे जीवन में अनेकानेक परिवर्तन आए। मैं 4 महीने से नियमित राजयोग का अभ्यास कर रहा हूँ एवं मुरली सुन रहा हूँ। यह गॉडली युनिवर्सिटी है जहाँ हम सब स्टूडेंट है, यहाँ आकर ज्ञान सीखते हैं और उसका पालन करते हैं फिर उसे कार्य व्यवहार में लाते हैं। इससे हमारा चरित्र श्रेष्ठ बनता है।
भ्राता अमित मिस्त्री |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में आकर मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं स्वर्ग में आ गया हूँ। यहाँ सकारात्मक ऊर्जा है। सभी एक-दूसरे से निःस्वार्थ भाव और शुद्ध दिल से मिलते हैं। बचपन में मेरे लौकिक बाबा का निधन हो गया था परन्तु परमात्मा से मिलकर मुझे अत्यन्त खुशी हुई और ऐसा लगा कि मुझे मेरा बाबा फिर से मिल गया है। अब मैं यहाँ प्रत्येक वर्ष आना चाहता हूँ और आप सभी से मिलना चाहता हूँ। मुझे बाबा, दादियां और आप सभी का आशिर्वाद चाहिए। मेरी पत्नी बचपन से ही `ओमशान्ति’ से जुड़ी है जिसके कारण मुझे यहाँ आने का परम सौभाग्य मिला है।
भ्राता गोपीचंद |
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मुझे महाराणा प्रताप का किरदार निभाने के लिए चुना गया था। यह किरदार निभाना मेरे लिए बहुत बड़ा उत्तरदायित्व था कि किस प्रकार इस महान किरदार को टीवी पर लेकर आऊं? यह किरदार निभाना बाबा ने ही सिखाया है। जब मैं सुबह उठता हूँ तो पहले बाबा को स्नेह और प्रेम से याद करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि यह किरदार सच्चे दिल से निभाऊं जिससे सबके मन में मुस्कराहट आ जाए। वर्तमान समय लोगों के मन में शान्ति लाना बहुत कठिन कार्य है लेकिन यह कार्य ब्रह्माकुमारी बहनें निःस्वार्थ भाव से कर रही हैं जिसका मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।
भ्राता शरद मल्होत्रा (महाराणा प्रताप सीरियल के ‘महाराणा प्रताप’) |
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भगवान को प्राप्त करने की अटूट इच्छा से मंदिरों में बहुत भक्ति की लेकिन कहीं सन्तुष्टि नहीं हुई। ब्रह्माकुमारी संस्था में सात दिन के कोर्स के दौरान तीसरे दिन राजयोग का अभ्यास करते समय मुझे आउट ऑफ बॉडी का अनुभव हुआ। कुछ पल तो समझ में नहीं आया कि यह क्या हुआ। बाद में संस्था की बहनों से बात करने पर पता लगा, `यह परमात्मा का मिलन का श्रेष्ठ अनुभव है।’ इसके बाद योग के अभ्यास में ऐसी अनुभूति कई बार हुई। सचमुच, परमात्मा का दिव्य मिलन होता है।
व्ही.के. मिश्रा, पूर्व महाप्रबंधक |
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माउण्ट आबू आने पर हमारा सम्बन्ध स्वतः ही परमात्मा से जुड़ जाता है। ब्रह्माकुमारी संस्था में परमात्मा के अवतरण के समय यहाँ का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। जब दादी के तन में अवतरित परमात्मा एक-एक व्यक्ति से संवाद करते हैं तो हमारा मन खुशियों से भर जाता है। मैं सोचता था, `भगवान से बातें करूं।’ परन्तु आज मेरा यह सपना सच हो गया। अब दिन की शुरूआत परमात्मा को गुडमॉर्निंग के साथ होती है।
श्री अनिल खंडेलवाल |
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ब्रह्माकुमारी संस्था के माध्यम से मुझे पता चला कि हम सभी आत्माएं परम सत्य एक परमात्मा की संतान हैं। हम उनकी बताई हुई श्रीमत पर चलेंगे तो वह हमेशा हमारे आसपास होंगे और हमारी मदद करेंगे। यह कथन तो सिर्फ भगवान का ही हो सकता है, `बच्चों तुम श्रीमत का एक कदम आगे बढ़ाओ, मैं मदद के हजार कदम आगे बढ़ाऊंगा।’ उनसे आज भी मिलन मनाता हूँ और अपनी हर बात बताता हूँ।
श्री रविन्द्र अग्रवाल |
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The expression ‘Om Shanti’, whose very utterance creates positive energy is the main slogan of Brahma Kumaris. I have travelled over 40 countries of the world and not found so much of positivity as in Brahma Kumaris Headquarters at Rajasthan. The atmosphere here is so serene and peaceful, that is why Brahma Baba selected Mount Abu. At this place we find philosophy of love in practical form. Here we find human souls communicating directly with the Supreme Soul.
Shri Rajesh Kumar |
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ब्रह्माकुमारी संस्था ने समर्पण, निष्ठा, अनुशासन, दृढ़ संकल्प, विवेचना और अपने दृष्टिकोण से समाज व विश्व के लिए जो कार्य किया है, वह अविस्मरणीय है। संस्था ने विगत 79 वर्षोंर् से विश्व के कोने-कोने में हर प्रकार के विभाजन को तोड़ने का सफल प्रयास किया है। ब्रह्माकुमारी॰ज विश्व के लिए आश्चर्य है। इनके पास विश्व को बदलने के लिए एक वि॰जन है। यह संस्था लोगों को अच्छा बनाने का श्रेष्ठ कार्य कर रही है। इस संस्था ने समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए कार्य किया है। यहाँ के भाई-बहन निःस्वार्थ सेवा में लगे हुए हैं। वर्तमान समय संस्था मूल्यों के विकास में सराहनीय कार्य कर रही है।
डॉ. भास्कर राव |
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It is only through God’s grace that one gets an opportunity to visit the headquarters of an international organisation that is concerned with character‐building and ensuring individual and world peace. This is the place which affords some restful moments out of an over‐busy life. I had heard a lot about the good work being done by the Brahma Kumaris organisation, and my personal visit has proved to be an eye‐opener and a soothing experience.
Mr. Shiv Gopal Mishra |
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In 1996, I came in touch with the Brahma Kumaris, I had all the bad habits of smoking, drinking and eating non‐vegetarian food. But my contact with them has changed my life completely. This has brought peace and tranquility in my life. It has improved even my health.
Mr. G.V.S.S.R. Anjaneylu |
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Brahma Kumaris organisation has transformed the lives not only of the common people but various politicians and businessmen also.
Mr. S. Kondal Rao Chairman |
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ब्रह्माकुमारी संस्था लोगों के अंदर चारित्रिक, नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय मूल्य विकसित करने का कार्य कर रही है। आज समाज को जिस चीज की अत्यन्त आवश्यकता है, उसके लिए पहल ब्रह्माकुमारी॰ज ने की है। यह संस्था सभी वर्ग के लोगों को एकजुट करने तथा आंतरिक रूप से सशक्त करने में भी काफी सहायक सिद्ध हुई है। इस संस्था में श्रेष्ठ ज्ञान दिया जाता है। श्रेष्ठ संस्कार भरे जाते हैं। जीवन के श्रेष्ठ उद्देश्यों को बताया जाता है जो अन्य विद्यालयों में सम्भव ही नहीं है। यहॉँ ‘वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना प्रत्यक्ष रूप में साकार हो रही है।’
श्री के. शेखराप्पा |
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आज मनुष्य देह अभिमानी हो गया है। वह ईश्वर से मिलन मनाना चाहता है, ईश्वर को पाना चाहता है परन्तु हमेशा उससे दुर ही रहता है। ब्रह्माकुमारी संस्थान में आत्मअभिमानी स्थिति ने मुझे बहुत प्रभावित किया। यहां से प्राप्त ज्ञान के बाद कई समस्याओं का समाधान सहज हो जाता है। आवश्यकता है कि वर्तमान समय मनुष्य अपने आपको जाने, समझे और ईश्वरीय शक्ति का अनुभूति करें।
श्री रामनाथ मुखीजा |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, आबू पर्वत में मुझे जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ। यहाँ का अदुभत अलौकिक एवं आध्यात्मिक वातावरण ने मुझे काफी प्रभावित किया। मेरी दिनर्चया प्रातः 4 बजे से शुरू हो जाती थी । मेडीटेशन, एक्सरसाइज और उसके बाद 6.30 बजे से ज्ञानवर्द्धक व्याख्यानों को सुनकर मुझे असीम सुख-शान्ति मिलती थी। वैसे मैं विगत 40 वर्षोंर् से अनिंद्रा की शिकार थी, नीRद के लिए मुझे दवाई लेनी पड़ती थी। साथ ही कई व्यक्तिगत मानसिक चिंताओें से भी घिरी रहती थी। यहॉँ आकर राजयोग ध्यानाभ्यास सीखी, अनेक राजयोगी विद्वानों को सुना। उनके सारगर्भित उद्बोधन ने मेरे मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डाला। इससे मेरी जीवन शैली में कई सकारात्मक परिवर्तन आये। वर्षों पुरानी समस्याओं को समाप्त करने हेतु सोचने और समझने का न॰जरिया बदला। मेरी नींद की गोलियां लेना बंद हो गईं और रात्रि को नींद आने लगी। मैं प्रतिदिन सकारात्मक विचारों से स्वयं को चार्ज करती हूँ। समाचार पत्रों को सुबह के बजाय सायंकाल पढ़ती हूँ। इस बात का मैं विशेष ध्यान रखती हूँ कि मुझे कभी क्रोध न आये। अब मैंने स्वयं को शान्त और सुखी रखना शुरू कर दिया है।
डाँ . राज पाण्डेय, एम.एस. |
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अगस्त, 2014 के प्रथम सप्ताह में मैं माउण्ट आबू गई थी। यहां की प्राकृतिक छटा को देखकर मेरा मन बहुत प्रफुल्लित ह§आ। 3-4दिन तो मझे स्वगजसा सखद अनभव हआ। यहां की आध्यात्मिक दिनचर्या में कोई बाह्म आकर्षण नही था। परिवार,टी.वी., सिनेमा और होटल इत्यादि की कभी याद भी नही आई। इनके अभाव में भी मुझे अधिक सुकून मिल रहा था क्योंकि यहां के वातावरण में सकारात्मक तरंगें थी। यहां पर शायद कुछ अदृश्य शक्तियां हमे प्रफुल्लित कर रहा था और इन सबके साथ,यहां जो ज्ञान की सरिता बह रही थी, उसका मैं शब्दों में वर्णन नही कर सकता। केवल अनुभव ही कर सकती हूं। सांसारिक प्रवत्ति होने के बावजूद भी इस प्रकार के परिवर्तन से हमे बहुत ही सुखद व आत्म-विभार हो रहे थे। बाह्म दुनिया से दुर होकर भी हम स्वंय से मिल रहे थे। ज्ञान की गंगा बहाने वाली ब्रह्माकुमारी बहनो का 3 दिनो तक सान्निध्य प्राप्त हुआ। अविस्मरणीय और अमूल्य एहसास को लेकर मैं अपने जीवन में वापस लौटी। मैं प्रत्येक समय उन्ही क्षणों का स्मरण करते हुए शिवबाबा की स्मãति में रहकर अपने आपको एक अलग ही व्यक्तित्व में पा रही हूं। डाँ. पुष्पा वर्मा, इन्दौर |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के भाई-बहनों पर दृष्टिपात करते ही मन में एक ऐसी छवि बन जाती है जो हमें बह्म व अन्तःकरण दोनों को पवित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस संस्थान से जुड़ने की सुखद अनुभूति को शब्दों में व्यक्त करना ऐसा है जैसे गूंगा व्यक्ति गुड़ की मिठास के बारे में बता नहीं सकता। अज्ञान से प्रकाश की ओर, हिंसा से अहिंसा और पाशविक जीवन से श्रेष्ठतम मानव जीवन की ओर ले जाने वाले इस विश्व विद्यालय के कार्यक्रमों व शिक्षाएं निश्चय ही मानव को उस परिवर्तन के लिए प्रेरित व आमन्त्रित कर रही हैं जहाँ पहुंचकर उसे यह आत्मबोध हो जाता है कि वह वास्तव में कौन है- शरीर या आत्मा? परमपिता की सन्तानों में राग-द्वेष, ईर्ष्या और कलह क्यों है? इन सभी कारणों का सही समाधान एवं निवारण मुझे परमपिता परमात्मा शिव की कृपा से संस्था के भाई-बहनों एवं दादियों के अमृतमयी वचनों से प्राप्त हुआ। मुझे लगा कि यहाँ घोर भौतिकवादी युग में एक बड़ा आध्यात्मिक इन्कलाब पल रहा है। एक बेहतर समाज के लिए अनुष्ठान और एक सतयुगी जीवन का विधान भी यहाँ देखने को मिला। श्री राजेन्द्र सिंह राणा, |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में अदभुत सुख-शान्ति के आध्यात्मिक वातावरण के मध्य श्वेत वस्त्रधारी बहनो और भाइयों को देखकर मुझे ऐसा लगा कि जिस फरिश्तो से साक्षात्कार हो गया हो। सबके चेहरों पर मुस्कराहट, वाणी मे विनम्रता, सबकी एक-दुसरे के प्रति सहयोग की भावना और परस्पर आदरभाव… अहा.. स्वर्गीय अनुभूति। यहां स्थान का नामकरण भी अति सुन्दर है `ज्ञानसरोवर।’ सरोवर के तट पर राजहंसो की किल्लोल, सामुहिक राजयोग का सात्विक तरंगें, सुख-शान्ति और समãद्धि के गीत, सुस्वादिष्ट समूह भोज, सभी कतार बद्ध, कहीं कोई छीना-झपटी नही। हजारों साधकां का जमघ॰ड परन्तु विश्राम स्थलां के किसी भी दरवाजे पर कोई ताला नही। यकीन की मिसाल। विश्वास की श्रंãखला। पांडव भवन का भव्यता और पीस पार्क की छटा। प्रवãति की गोद में बसे इस विहंगम दृश्य की यादो तले ब्रह्मा बाबा का त्याग, तपस्या आर बलिदान भरा जीवन। सर्वस्व न्यौछावर इंसानयत की खिदमत के लिए।
प्रो . राजीव शर्मा |
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यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा मनुष्य की आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत कर व्यक्तित्व के समग्र विकास हेतु बहुआयामी कार्यक्रम प्रतिवर्ष संचालित किए जाते हैं। आज आधुनिकता की आंधी तथा भौतिकतावादी परिवेश में मानसिक शान्ति प्राप्त करना एक अत्यन्त कठिन कार्य है। हम अपने धर्म, कर्म और स्वयं से अपनों को कैसे जोड़ें? आपकी संस्था पूरे विश्व में यह भूमिका निभाती है जिसके लिए आप सभी बधाई के पात्र है। हमारे जीवन की गुणवत्ता, संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए आपका वैश्विक प्रयास सफल हो, यही हमारी कामना है।
श्रीमति सुनीति यादव |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा नवोदित छत्तीसगढ राज्य के लोगों में योग, ध्यान-साधना सम्बन्धी प्रशिक्षण के माध्यम से सकारात्मक सोच जागãत करने, स्वंय को जानने और पहचानने हेतु अत्यन्त सराहनीय कार्य किया जा रहा है। आपके विश्व विद्यालय द्वारा राष्ट्रीय एव अंन्तर्राष्ट्राय स्तर पर शिक्षा के प्रसार, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और स्वच्छ पर्यावरण की संरचना हेतु उल्लेखनीय योगदान किया जा रहा है जिसक लिए हम अपनी वãतज्ञता ज्ञापित करते है।
श्री कष्ण चन्द्र यादव, आई.एफ.एस. |
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मुझे 3-4 बार माउण्टआबू जाने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। मेरा मानना है कि यहाँ का वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक तथा चंचल मन को शान्त करने वाला है। यह स्थान एक तपोभूमि है जहाँ ब्रह्मा बाबा ने शुद्ध मन से सारे संसार के कल्याणार्थ तथा भ्रातृत्व भाव के लिए शारीरिक व आध्यात्मिक तपस्या की है। जब भी माउण्ट आबू से वापिस आया तो पाया कि मैं स्वयं के अधिक निकट पहुँच गया हूँ। यही कारण है कि प्रत्येक बार की यात्रा पर मैंने ढेरों पुस्तकें खरीदीं जिसको स्वयं भी पढ़ा और अपने मित्रों को उपहार में भी दी। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि ब्रह्माकुमारियों का परिवार जो सारे विश्व में फैला है, वह प्रत्येक घर मे पहुँचे ताकि सभी नर-नारी सुख, शान्ति और आनन्दमय जीवन व्यतीत कर सके।
श्री बलभद्र देव थापर |
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I have seen and experienced the work in progress in Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Viswa Vidyalaya, Cuttack for the last many years. In the present‐day ‐ conflict‐ ridden time and society, such efforts as done by Brahma Kumaris ‐ have a stabilizing effect. I expect and wish further success to the organization in times to come.
Prof. Sanatan Rath |
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In the lap of divine sisters and with the warmth of their company my ‘Aura’ increases manifold and I go back as a blessed soul to shower that warmth and happiness everywhere. The moment they tell me that I belong to them is the most proud moment for me.
Ms. Harjinder Kaur |
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The more I have learnt and come to know about the Brahma Kumaris and their organization, the more I have come to admire them for their thoughts and principles. Yes, it is their discipline, self control, and organizational methods and skills that make me respect them as super human beings. Indeed, they are truly an amazing group of people, working to make PEOPLE good, so that the world becomes safer, better and happier.
Shri Kalyan Banerjee |
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I and many of Muslim Social workers as well as Gandhian social workers visited twice the Abu head office complex of Brahma Kumaris. Brahma Kumaris is a unique organization for value Education & Spirituality. This organization functions on the basic principle of purity. We feel that Brahma Kumaris organization is rightly working for achieving the goal of Ram Rajya. Haji Gafurbhai M. Bilakhia |
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A divine Experience after having been exposed to spiritual way of life‐ A Concept given to the world for universal Brotherhood. Entire life style felt a significance change after coming to the main stream of BK’s. Sisters are so polite and Brothers are so respectful that one is attracted towards the main stream of Bks.
Er. H.S. Bhatt |
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I had a complete tour of the facilities at Gyan Sarovar which were so waid out and beautifully landscaped. I also took time to visit the kitchen and the volunteers who work to provide the tasty but simple meals and was pleasantly surprised to observe the cleanliness and good hygiene that prevailed in the cooking area where meals are prepared for more than 2000 persons in a matter of two hours. The following morning, I was privileged to have been invited for breakfast at Shantivan with BK Nirwair. I also took a tour of the facilities at Shantivan and was very impressed with the huge hall that can seat 20,000 persons. I visited the ultra‐modern kitchen which provides meals for 20,000 persons and all the cooking is carried out using solar power. I have very pleasant memories of my visit to Gyan Sarovar and Shantivan the abode of the Brahma Kumaris.
Mr. Yash Pal Das |
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आप ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों-भाइयों के पास आध्यात्मिक ज्ञान का जो अनुभव है उसका इन्फेक्शन समाज को जरूर लगाइये। इस आध्यात्मिक इन्फेक्शन से भ्रष्टाचार, अत्याचार, व्यसन, फैशन इत्यादि जैसे अनेकानेक इन्फेक्शन समाप्त हो जाएंगे। आज हमारे पास अत्याधुनिक तकनीकी उपलब्ध है लेकिन इसका हम सही उपयोग करने के बजाय दुरूपयोग अधिक करते हैं। लेकिन ब्रह्माकुमारी संस्था में इन सभी साधनों का सदुपयोग होते देखकर मुझे अत्यंत खुशी हुई।
न्यायमूर्ति श्री रविराम त्रिपाठी |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में दादी ह्दयमोहिनी जी के शरीर में परमात्मा का अवतरण होते हुए मैंने साक्षात् देखा है। जब दादी के तन में परमात्मा आए तो सब कुछ बदल गया। उस समय मैं बिल्कुल परमात्मा के सामने बैठा था, तो सोचा कि मुझे शिवबाबा क्यों नहीं बुला रहे हैं। उसी समय तुरन्त बाबा ने मुझे बुलाया। उनके सामने जाते ही सब कुछ भूल गया और मुझे अपनी असलियत की स्पष्ट छवि महसूस होने लगी। मुझे लगा जैसे मैं यहाँ हूँ ही नहीं। यह सच है कि परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित होकर नई दुनिया की स्थापना का कार्य करा रहे हैं।
न्यायाधीश श्री रमेश गर्ग |
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The efforts of the organisation of Brahma Kumaris in encouraging deliberations on the role for values in bringing about peace and development in the world is worthy of appreciation. I have no hesitation in calling upon men and especially women to bear the mantle of value based communication and cause the world to develop a global village where purity of thought brings “constant and true peace and happiness.
Justice G. N. Ray |
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It has been a great pleasure for me to be associated with the Brahma Kumaris in some way or the other. Let me express my great feeling that a ‘sapling’ planted and nourished by ‘God himself’ in 1936 has now grown into a beautiful tree with its branches spread across the globe. Initially started by a group of 300 spiritually awakened people, today it has ten lakh members in 8,500 branches across the planet. And they have the vision to lead a value‐based life and creating a world of purity, peace and happiness. The Brahma Kumaris have stressed upon the core values that lie in each human being. It has been reminding the world that nurturing these values by various means like Rajyoga meditation and by observing one’s own peaceful principles in one’s own conduct, help create a lovelier and kinder world.
Mr. P.P. Wangchuk |
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What has profoundly impressed me about the institution of the Brahma Kumaris is the compulsive obsession you acquire for human values and the urge to live up to the highest standards of purity, simplicity and selflessness in life once you get acquainted with it. As a journalist of 50 years’ standing, I have always wished and tried to work for value‐based journalism. I am, therefore, glad to say that nothing has pleased me more for having got associated with this institution than its effort to create awareness among media persons of the need to practise such journalism. While congratulating the Brahma Kumaris, I wish it to live forever and continue to serve the humanity.
Prof. (Dr.) N.K. Trikha |
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In pursuit of physical comforts and material well being, we can ill afford to disregard moral values and spiritual principles which are, in fact, the bed rocks for our holistic development and sustainable growth. The socio‐spiritual programs organized by the Brahma Kumaris which aims at value orientation and inner empowerment of people, are essential for restoration of a peaceful, progressive and prosperous society.
Dr. Sandeep Marwah |
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ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सिखाये जाने वाला राजयोग हमारे जीवन को सुखमय एवं पवित्र बनाता है। यह एक संजीवनी बूटी की तरह है जो आत्मा की आन्तरिक शक्तियों को पुनः जागृत करने का कार्य करता है। जागृत मनुष्य ही जागृत समाज का निर्माण कर सकते हैं।
कुमारी हंसा बहन कुंवरबा राज |
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समाज सेवाओं के क्षेत्र में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से किया जा रहा कार्य अद्वितीय है। सारे विश्व में यही एक संस्थान है जो मुख्य रूप से महिलाओं के द्वारा ही संचालित किया जा रहा है। समस्त विश्व में शान्ति , सुख तथा प्रेम की स्थापना का यह प्रयास अत्यन्त प्रशंसनीय है।
बहन लाजवन्ती |
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आज समाज में अनेक विकृतियां पैदा हो गई हैं। उन्हें दूर करने के लिए अनेक समाजसेवी संस्थाएं कार्य तो कर रही हैं परन्तु श्रेष्ठ समाज की सरंचना के लिए समाज-सेवकों को अपने स्वार्थ को त्याग कर निःस्वार्थ भाव से सेवा करनी होगी। समाज सेवा का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण और असीमित है। समाज-सेवकों को व्यसनों व विकारों से ग्रस्त मनुष्यों तथा तनावपूर्ण व अशान्त वातावरण को बदलने के साथ-साथ टूटते परिवारों को भी जोड़ने का कार्य करना चाहिए। ब्रह्माकुमारी संगठन की ओर से धर्म व जाति से ऊपर उठकर आत्मिक उत्थान व बुराइयों को समाप्त करने का प्रयास अनुकरणीय है।
बहन गुरूदयाल कौर |
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वर्तमान घोर कलियुग में ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े हुए सभी ब्रह्माकुमार तथा ब्रह्माकुमारियां, जो परमात्मा शिव की प्रेरणानुसार अपनी पूँजी इस महान कार्य में लगा रहे हैं, उसका फल आज नहीं तो कल अवश्य ही बहुत सुन्दर निकलेगा। हम सभी साधु-सन्त भी इन भाई-बहनों को बहुत-बहुत प्यार और आशिर्वाद देते हैं।
श्री 1008 स्वामी रामाचार्य, वैदिक पाठशाला, गया |
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मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब समझता हूँ कि मुझे ब्रह्माकुमारी संस्था में आने का अवसर प्राप्त हुआ है। यहाँ मैंने आध्यात्मिक और मानसिक शान्ति की अनुभूति की है। हमें परमात्मा के प्रति सम्पूर्ण समर्पित होना चाहिए क्योंकि परमात्मा सुख दुःख और विपत्ति के समय हमारी मदद करते हैं। मैं इस संस्था के सभी भाई-बहनों का धन्यवाद करता हूँ जो निःस्वार्थ भाव से विश्व शान्ति के लिए प्रयास कर रहे हैं।
श्री आनंद कौशिक |
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महिला होना गौरव की बात है। मैं चाहती हूँ कि अगले जन्म में भी महिला ही बनूं। महिला द्वारा परिवार में लिए गए उचित निर्णय आर्थिक सशक्तिकरण का आधार होते हैं। इससे उनके अन्दर नेतृत्व करने की भावना आती है। महिलाओं को अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए निर्भाक बनना चाहिए। ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दी जा रही मूल्य और आध्यात्मिक शिक्षा से नारी अपनी गरिमा को पहचान कर स्व-सशक्तिकरण कर सकती है। संस्था द्वारा किए जा रहे कार्य प्रशंसनीय है।
श्रीमति अंजू शर्मा |
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नारियों की स्थिति को देखकर मुझे ऐसा लगता है कि आज नारी का अस्तित्व खतरे में आ गया है। अब ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जिससे नारी अपनी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सके। आज हम अपनी वास्तविक संस्कृति एवं संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर कुरीतियों को अपनाते जा रहे हैं। मीडिया ने महिलाओं को विज्ञापन की वस्तु बना दिया है। यह सभी बातें महिलाओें को समाज में अपना सम्माननीय स्थान प्राप्त करने से वंचित कर रही है। ब्रह्माकुमारी संस्था ने नारी को ‘देवी बनने की शिक्षा देकर अपना खोया हुआ गौरव पुनः प्राप्त करने का अवसर दिया है।’
श्रीमति अनुराधा सिंघई, अध्यक्षा, भारत यूरोप वाणिज्यिक चैम्बर, भोपाल |
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मानवीय व्यवहार का सच्चा ज्ञान मुझे इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय में देखने और सीखने को मिला है। आज महिलाओं और बच्चों पर हो रहे अत्याचार के उन्मूलन के लिए 137 देशों में 8,500 से भी अधिक सेवाकेन्द्रों द्वारा ब्रह्माकुमारी संस्था जो कार्य कर रही है, उसकी मैं दिल से सराहना करता हूँ।
श्री अरविन्द लाडानी |
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ब्रह्माकुमारी संस्था के अलावा किसी भी संस्था में आत्मा का वास्तविक ज्ञान नहीं मिल सकता। अन्य संस्थाएं सिर्फ शरीर का ज्ञान देती है। कोई भी संस्था यह स्पष्ट नहीं बताती है कि हमें शान्ति कैसे मिलेगी और सुख कैसे मिलेगा। आत्मा का ज्ञान होने से हमें आत्मिक शान्ति मिलती है। आत्मिक दृष्टिकोण की धारणा से आपस में स्नेह, प्रेम और भाईचारे की भावना बढ़ती है, सकारात्मक विचार बढ़ते हैं और नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं। इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर आत्मा ही पार्ट बजाती है, शरीर तो विनाशी है। आत्मा एक शरीर से निकलकर दूसरे शरीर में प्रविष्ट होती है, यह बात हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों में लिखी हुई है। यदि हम अपने जीवन में सच्ची सुख-शान्ति, प्रेम, पवित्रता और आनंद बनाए रखना चाहते हैं तो आत्मा का ज्ञान होना आवश्यक है।
श्री अशोक मणीतरवे |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय का वातावरण में एक अलग प्रकार की एनर्जी है जहाँ मुझे गहन शान्ति और पवित्रता का अनुभूति हुई। इस आधार पर मैं कह सकता हूँ कि वहाँ पर परमात्मा का दिव्य व अलौकिक अवतरण होता है और परमात्मा स्वयं शिक्षा देकर मनुष्यात्माओं को अविनाशी ज्ञान-रत्नों से श्रृंगार करते हैं। अब यह कलियुगी दुनिया का महापरिवर्तन है और सतयुग की स्थापना होनी है। इस तरह यह चक्र हमेशा चलता रहता है। आप भी से मंगल-परमात्मा मिलन मना सकते हैं।
श्री अश्विनी कुमार |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आध्यात्मिक जनजागृति का जो अनूठा कार्य किया जा रहा है, वह निश्चित रूप से ऐतिहासिक, जन कल्याणकारी और धरती को स्वर्ग बनाने के लिए अत्यन्त प्रशंसनीय है।
बाल ब्रह्मचारी बसन्त जैन ब्रह्मानन्द |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में आत्मा एवं परमात्मा का ज्ञान स्पष्ट तरीके से बताया जाता है। इस ज्ञान को आज जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। यहाँ के ज्ञान से ही विश्व में मूल्यों की स्थापना सम्भव है। स्वयं को आत्मा समझकर सर्वशक्तिमान परमात्मा को याद करना है। इससे हमारे अंदर अष्ट शक्तियों का विकास होगा जो वर्तमान समय की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में मददगार साबित होगी।
श्री भीमसिंह तोमर |
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The ‘Brahma Kumaris’ organization has been interacting with various administrative departments very gracefully over the years. They are one organization which spreads optimism and goodwill. Their latest initiative is very meaningful and timely. I wish them all the very best and hope/pray that many would co‐opt this theme.
Mr. Chetan B. Sanghi |
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‘विश्व परिवर्तन’ होगा या नहीं होगा, यह तो परमात्मा ही जान सकते हैं परन्तु ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यों और यहाँ की साधना प्रणाली से स्व-परिवर्तन अवश्य ही होगा- यह मुझे दृढ़ विश्वास है। इस स्थान पर निश्चय का बल सहज ही आता है, गलत धारणाएं जल्दी समाप्त हो जाती हैं। इसलिए मैं कह सकता हूँ कि तपोभूमि ज्ञान सरोवर परमात्म-साधना में अत्यन्त सहायक है।
स्वामी दीनानाथ जी महाराज |
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It is indeed a matter of great joy and pride to state that the Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya dedicatedly works for the social welfare and upliftment of the society in multifaceted ways. This is the first renowned institution that works for cultivating values in higher education by framing special courses for it. It constantly strives to strengthen and empower men and women by inculcating spiritual thoughts in them and encourging them to lead a life of simplicity, hygiene and purity. The institution also shows a special concern for the youth and works for the eradication of negative addictions. The institution also extends its services for the global health through its multi‐dimensional programmes, especially, focusing on the treatment of heart related problems. In brief it is not an exaggeration to state that this organisation truly works for the betterment of the society from all the aspects. Dr. Dipooba Devda |
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The indelible impression left by the great soul (Prajapita Brahma) would always continue to inspire humanity. These are very rare moments in thousands of years when such souls as Brahma Baba take birth. The aim of education is an all‐round development of personality alongwith the acquisition of moral and spiritual values.
Dr. Suresh Prasad Singh |
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ब्रह्माकुमारी संस्था ने हिन्दुस्तान और कौमी एकता की बुनियाद को मजबूत करने का कार्य किया है। यह वास्तव में काबिले तारीफ है। शान्ति और पवित्रता का संदेश यहॉँ की पवित्र बहनें दे रही है। शान्ति और सद्भावना सबसे बड़ा संदेश है। यह संदेश पूरे विश्व में फैलता जा रहा है। धर्म हमेशा जोड़ने का कार्य करता है, तोड़ने का नहीं। इस संस्था में भी सभी धर्मों को जोड़ने का कार्य चल रहा है। यहाँ सभी को समान रूप से आदर और सम्मान दिया जाता है तथा लोगों के दिलों को जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य चलता है।
हाजी झुमा राईमा, गांधीधाम मस्जिद |
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सिरोही जिले में ब्रह्माकुमारी संस्था का अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय है जिसमें दुनिया भर के लोग आते हैं। हमें इस संस्था के साथ मिलकर गाँवों को आदर्श गाँव बनाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि गाँव का विकास ही जिले, प्रदेश और देश के विकास की सीढ़ी है। वर्तमान समय सामाजिक कुरीतियों के निवारण एवं आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। सरकार की ओर से भी बहुत सारी योजनाएं चल रही हैं जो लोगों के लिए हितकारी है।
श्री ईश्वर सिंह दहिया |
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ब्रह्माकुमारी संस्था के ज्ञान से क्रोध पर नियंत्रण करना सहज है। जब से मैंने यहाँ से प्रशिक्षण लिया है, तब से मेरे व्यवहार में काफी परिवर्तन आया है। मैं पहले की अपेक्षा और अधिक अच्छे ढंग से सबसे व्यवहार करता हूँ। मैंने यह सीखा है कि दो मिनट साइलेंस में बैठने से प्रतिकूल परिस्थितियों और समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए सहायक है। जब से हमारी कम्पनी में यह ट्रेनिंग कार्यक्रम चल रहा है तब से अप्रत्यक्ष रूप से ‘टीम वर्क’ की भावना बढ़ी है। इस संस्था में इफको के पांचों ॰जोन के प्रतिनिधि आते हैं जिससे कंपनी के अंदर ‘एक फैमली कल्चर’ का वातावरण बन गया है। ट्रेनिंग कार्यक्रम से नकारात्मक संस्कार वाला मनुष्य भी बदल जाता है। उनके अंदर सकारात्मक दृष्टिकोण आ जाता है। हमारी कम्पनी के वर्करों की यहाँ माउण्ट आबू आने के लिए क्यू लगी रहती है।
श्री जी.के. गुप्ता |
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ब्रह्माकुमारी संस्था के अन्तर्राष्ट्रीय मुख्यालय को देखने से लगता है- ‘यह धरती का स्वर्ग है।’ यहाँ की व्यवस्था और अनुशासन अत्यन्त सुंदर है। यहाँ के भाई-बहनों के अंदर समर्पण भावना है। यदि हम भी अपने जीवन में इस प्रकार की समर्पण भावना को अपनाये तो हमारा जीवन श्रेष्ठ बन जाएगा। जब तक हम आंतरिक रूप से पवित्र नहीं बनेंगे, तब तक स्व-परिवर्तन असम्भव है। आत्म-उन्नति के लिए राजयोग मेडीटेशन एकमात्र उपाय है।
श्री जयंतीलाल जैन |
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आध्यात्मिक मूल्यों की कमी के कारण ही समाज में अराजकता की स्थिति है। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा किया जा रहा आध्यात्मिकता का प्रचार-प्रसार निःसंदेह ही समाज, देश और सम्पूर्ण विश्व को बदलने में सार्थक सिद्ध होगा। यह विश्व विद्यालय मूल्यनिष्ठ समाज के पुनर्निमाण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है तथा आध्यात्मिक शिक्षा के महत्व को समस्त समाज में उजागर कर एक नए विश्व की स्थापना के सपने को साकार कर रहा है।
श्री के. के. बागड़िया |
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ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दी जा रही शिक्षा से व्यक्ति ब्रॉड माइंडेड (विकसित) हो जाता है जिससे उसकी सोच में काफी परिवर्तन आता है। इस संस्था ने जब से हमारे यहाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है तब से हमारी कम्पनी को बहुत लाभ मिला है। इससे काम करने वाले वर्करों के बीच आपसी सामंजस्य की भावना बढ़ी है और उनकी कार्यकुशलता में भी वृद्धि हुई है संस्था की बहनों ने हमें जो आध्यात्मिक शिक्षा दी है उसके आधार पर मैं कह सकता हूँ कि हमारी पहचान शरीर से नहीं बल्कि आत्मा से है। श्रेष्ठ कर्मों के आधार पर ही हमारा अगला जन्म अच्छा होता है। यहाँ का ज्ञान व्यक्ति, समाज, देश और विश्व को बदलने में सहायक है।
श्री के.के. सिंह |
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Peace and culture are so much inter‐connected that we cannot think of the one without the other. Peace is necessary for the very survival of human race. But going by the present scenario of indicipline, strikes and closure of educational institutions for long periods, culture of peace seems to be an elusive proposition. However, I am deeply impressed by the meditation training imparted by Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya. In fact, Brahma Kumars and Brahma Kumaris are the symbols of peace and purity.
Prof. K.N. Poddar Principal |
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सही अर्थों में, यह संस्था संस्कार परिवर्तन का सर्वोत्तम कार्य कर रही है। यहाँ आने के पश्चात् स्वयं का वास्तविक परिचय प्राप्त होता है। यह संस्था साबित करती है कि यदि परमात्मा के सान्निध्य में मनुष्य चला जाए तो उसका जीवन निर्विघ्न, सहज और श्रेष्ठ बन जाता है। यहाँ मैंने देखा है कि ईश्वरीय शक्ति के आधार पर सारा कारोबार सही तरीके से चल रहा है। यहाँ मुझे 3 बार माउण्ट आबू में परमात्मा से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। यह मेरे जीवन का सबसे सुखद पल है और श्रेष्ठ भाग्य का परिणाम है। यहाँ दिया जा रहा ज्ञान प्रत्येक रीति से स्पष्ट है। इसमें कोई अंधविश्वास की बात नहीं है।
श्री करूणा करन भंते |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सुख-शान्ति का स्रोत है। इस विश्व विद्यालय से महिलाओं का सम्पूर्ण सशक्तिकरण होना निश्चित है। यहाँ के आध्यात्मिक ज्ञान को हम सदा अपने साथ रखें।
श्रीमति किरण चोपड़ा जी |
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मैं पिछले डेढ़ वर्ष से निरन्तर शिवबाबा की `मुरली’ सुन रहा हूँ व राजयोग का अभ्यास भी कर रहा हूँ, उसका अपना अनुभव मैं आप सभी से बांटना चाहता हूँ। आत्म-शान्ति `राजयोग’ के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है क्योंकि इस समय मनुष्य पांच विकारों `काम, क्रोध, लोभ, मोह एवं अहंकार’ से ग्रसित है। जब तक इन पांचों विकारों से मनुष्य मुक्ति प्राप्त नहीं करेगा, तब तक उसको सन्तुष्टता एवं आत्म-शान्ति प्राप्त नहीं हो सकती। आज हरेक आत्मा में सतोगुणी, रजोगुणी व तमोगुणी ये तीन प्रकार के संस्कार समाये हुए है तथा शुद्ध व अशुद्ध संस्कार पूर्व कर्मो पर आधारित है। मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हुं कि याद मनुष्य निरन्तर परमात्मा की श्रीमत पर चल, शुद्ध संकल्प रखे और स्वंय का परमात्मा पर पूर्ण रूप से समर्पित करें तो इन पांचो विकारो पर नियत्रंण प्राप्त कर आत्म-सन्त§ष्टि एवं शान्ति प्राप्त कर सकता है। वर्तमान समय परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर अपने बच्चो को, जोकि इस समय तमोप्रधान बन गए है और विकारो से ग्रसित है,उन्हें मुक्ति-जीवनमुक्ति दिलाने के लिए आए हुए है। परमात्मा सभी आत्माओं को इन अवगुणों से मुक्ति दिलाकर स्वर्ग में ले जाने के लिए कर्तव्यरत है। इसलिए मेरे विचार में यह सभी मनुष्यों के लिए सचमुच बहुत ही पवित्र समय है जिस में वह परमात्मा की याद में रहकर सभी पापों से मक्ति पाकर स्वर्ग में जाने का रास्ता बना सकते हैं।
जस्टिस एल.सी. भट्ट, इन्दौर |
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझे आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा एवं उनके विकास की जिम्मवारी दी है। आज महिलाओं को अपनी आंतरिक शत्तियों को जागृत करने की आवश्यकता है। महिलाओं को कानून की जानकारी के साथ-साथ सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं और सुरक्षा का ज्ञान होना आवश्यक है। अज्ञानता नारी के लिए एक अभिशाप है। सिनेमा जगत की प्रस्तुतियों को सकारात्मक और सुन्दर होना आवश्यक है। हिंसा एवं नकारात्मक शिक्षा देने वाले कार्यक्रमों से नारी हिंसा को बढ़ावा मिला है। महिला विकास के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा की गई सेवाओं की मैं सराहना करती हूँ।
श्रीमति लीलाबेन अंकोलिया, अध्यक्षा, गुजरात महिला आयोग |
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आज भी भारत में प्राचीन प्रथायें प्रचलित हैं। दक्षिण भारत में कुछ स्थानों पर भगवान के नाम पर गरीब बच्चियों कों देवदासी बनाकर उनका शोषण किया जाता है। ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों द्वारा दी गई आध्यात्मिक शिक्षा से समाज में फैली हुई ऐसी कुप्रथाओं को जड़ से समाप्त कर सकते हैं।
श्रीमति लीना मंडहले, आई॰ ए॰ एस॰ |
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मैं विगत कुछ वर्ष पूर्व माउण्ट आबू स्थित ब्रह्माकुमारी संस्था में ‘सर्व धर्म सम्मेलन’ में भाग लेने गया था। वहाँ की शान्ति और पवित्रता का वातावरण देखकर बहुत अच्छा लगा। यहाँ आने से अविस्मरणीय शान्ति का अनुभव किया। संस्था विश्व बन्धुत्व की दिशा में अच्छा कार्य कर रही है। आज समाज को मूल्यों की अत्यन्त आवश्यकता है।
महंत रामकरण बापूaअतनजाण आश्रम |
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वर्तमान समय भारत सहित पूरे विश्व पर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार की जो प्रवृत्तियां हैं वह समाज को दूषित कर रही है। आज जितने भीr धर्म व सम्प्रदाय हैं, सबका एक ही लक्ष्य है- मानव का उद्धार कैसे हो! सत्यता का प्रचार कैसे हो! इस दिशा में यह संस्था जो कार्य कर रही है, वह बहुत ही अच्छा और सराहनीय है।
महंत स्वामी रवीन्द्रपुरी |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आध्यात्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्तर पर मानव के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत है। यहाँ गृहस्थ जीवन में रहते हुए संस्कारों को श्रेष्ठ बनाने पर विशेष बल दिया जाता है। पंथ, भाषा, क्षेत्र, नस्ल इत्यादि के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवीय धर्म की धारणा के आधार पर संस्था का कार्य उल्लेखनीय है। महिलाओं के सम्मान के साथ-साथ मन की पवित्रता, पारिवारिक जीवन में प्रेम, समाज में सहभागिता तथा विश्व शान्ति के लिए संस्था के कार्यकर्ता निरन्तर निःस्वार्थ भाव से कार्यरत रहते हैं। यहाँ शाकाहार व सात्विकता पर भी जोर दिया जाता है जिससे तन व मन पर तामसिक प्रभाव न पड़े। आधुनिक विश्व में ग्रीन मूवमेंट के लिए संस्था द्वारा समय प्रति समय कई अभियान भी चलाये जाते हैं तथा इसका पूर्ण रूप से पालन भी किया जाता है। मेरे विचार से संस्था के सिद्धान्त उच्च स्तर के हैं। भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का प्रयास अत्यन्त सराहनीय है।
श्रीमति मंजू गुप्ता, डिवि॰जनल रेलवे मैनेजर, नॉर्थ-वेस्टर्न रेल्वे, बीकानेर, राजस्थान |
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आज समाज में महिलाओं के प्रति मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रताड़ना बढ़ी हैं। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सन् 1936 से महिलाओं के सम्मान और उन्हें सशक्त बनाने के लिए श्रेष्ठ कार्य कर रहा है। इनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान से जीवन जीने की कला आ जाती है।
श्रीमति मोनू हुमागेन |
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आध्यात्मिकता के बिना समाज को मूल्यनिष्ठ बनाना सम्भव नहीं है। सामाजिक समस्याओं को जड़ से उखाड़ फेंकने का अध्यात्म ही सर्वश्रेष्ठ समाधान है तथा देश व दुनिया में एकता स्थापित करने का एकमात्र साधन है। वर्तमान परिवेश में मनुष्य सामाजिक, धार्मिक और राजनैतिक क्षेत्र से गुजर रहा है। इन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाकर मूल्यों की पुनर्स्थापना करने की आवश्यकता है जो केवल मैंने ब्रह्माकुमारी संगठन के कार्यकर्ताओं में देखा है। समाज कल्याण के कार्योंर् के लिए समाज सेवा से जुड़े हुए सभी क्षेत्र के लोगों को इस संगठन को सहयोग देने हेतु आगे आना चहिए।
श्री नाना भाऊ एम्बडवार |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में आने के बाद मुझे शान्ति, पवित्रता और आनन्द की अनुभूति हुई। यहाँ उपस्थित होने का एहसास ही निराला है। अज्ञानता यहाँ आकर दम तोड़ देती है। साक्षरता के साथ बुद्धिमता के लिए आध्यात्मिकता आवश्यक है। वर्तमान समय में नारी ाहिंसा जैसी घृणित एवं अपराधिक भावनाओं का कारण बेरोजगारी, आार्थिक तंगी, भ्रष्टाचार इत्यादि है।
श्री नौशाद अली |
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ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा पर्यावरण, नशामुक्ति, मेडिकल कैम्प, आपदा प्रबंधन और स्वच्छता अभियान इत्यादि जनोपयागी कार्यक्रमों से समाज में काफी सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इसके लिए मैं संस्था का आभार व्यक्त करता हूँ।
श्री ओटाराम देवासी |
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मैं यहाँ चार बार आई हूँ और प्रत्येक बार आध्यात्मिक शत्तियों का अलौकिक अनुभव किया है। भारत देवताओं, पीरों और पैगम्बरों का देश है जहाँ महिलाओं को आदि समय से ही सम्मान दिया जाता है। सभी क्षेत्रों में नारियां उन्नति के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचाने में सफल रही हैं। फिर भी आज नारी डरी-सहमी सी क्यूं हैं? घर, स्कूल और कार्यस्थल पर भी नारी असुरक्षित क्यों है? अनेक कानूनी प्रावधानों का प्रभाव भी क्यों नहीं दिख रहा है? इसके लिए मैं समझती हूँ कि नैतिक शिक्षा के बिना महिलाओें की सुरक्षा की कामना करना असम्भव है। यह संस्था महिला सशक्तिकरण के लिए काफी मददगार साबित हो रही है।
श्रीमति परमजीत कौर, अध्यक्षा, पंजाब महिला आयोग |
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ब्रह्माकुमारी संस्था में आने से पूर्व मेरे मन में कई नकारात्मक विचार आते थे जिससे मेरीआदतें बहुत ही खराब हो गई थीं और जीवन नर्क के समान बन गया था। मैं मई, 2013 में संस्था के सम्पर्क में आया। यहाँ दी जा रही शिक्षाओं से मेरे जीवन में अचानक ही सकारात्मक परिवर्तन आना शुरू हो गया और मेरा जीवन सुख-शान्ति से सम्पन्न बन गया। अब मैं अपने कार्योंर् को पहले की अपेक्षा अधिक कुशलतापूर्वक करता हूँ। माउण्ट आबू में स्थित ब्रह्माकुमारी संस्था में जो निःस्वार्थ प्रेम मिला, वह परमात्मा के सिवाए और कोई दे नहीं सकता। आज तक मैं परमात्मा को मंदिरों में ढूंढ़ता था, वह आज मुझे सहज ही मिल गया है। मुझे पूर्ण निश्चय हो गया है कि परमात्मा जब आएंगे तो इसी तरह से आएंगे और असाधारण रूप से शिक्षा देंगे। मेरे जीवन में जो भी परिवर्तन आया है उसे मैं परमात्मा की ही शक्ति का परिणाम मानता हूँ और परमात्मा को धन्यवाद देता हूँ कि उसने मुझे दैवी दुनिया में स्थान दिया है।
श्री प्रमोद के. सिंह, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, दूरदर्शन, दिल्ली |
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा राजयोग ध्यानाभ्यास द्वारा मन की एकाग्रता को बढ़ाने तथा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक, बौद्धिक एवं सामाजिक समरसता बढ़ाने का पुनीत कार्य किया जा रहा है। संस्था का यह कार्य प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है। समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी एवं सहयोग से संस्था अपने उद्देश्यों में अवश्य ही सफल हो, ऐसी अपेक्षा के साथ अनेकानेक शुभकामनाएं।
श्री प्रताप कृदत्त |
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संस्था की सादगी और सर्व के साथ समान व्यवहार ने मुझे बहुत अधिक प्रभावित किया है। मेरा मानना है कि ब्रह्माकुमारी॰ज में जो ज्ञान दिया जा रहा है वह स्वयं परमात्मा द्वारा दिया गया ज्ञान है। यहाँ के ज्ञान से हमारे अंदर परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति का विकास होता है। इस ज्ञान को पुलिस व अन्य अर्द्धसैनिक बलों को दिए जाने की अत्यन्त आवश्यकता है क्योंकि उनका अधिकतर समय तनाव में गुजरता है और वो सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। यहाँ के लोगों का समर्पण भाव बहुत ही अनुकरणीय है। इस संस्था को परमात्मा के अलावा और कोई नहीं चला सकता है। यहाँ दिए जा रहे ज्ञान से निश्चित ही पूरे विश्व का परिवर्तन होगा और एक नई दुनिया की स्थापना होगी। भारत प्रारम्भ से ही आध्यात्मिक गुरू रहा है। ब्रह्माकुमारी संस्था ने आध्यात्मिकता के अलावा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। यह संस्था आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी दे रही है जो जीवन में काफी उपयोगी है।
श्री रघुनाथ प्रसाद सिंह, पूर्व, पुलिस महानिरीक्षक, पटना, बिहार |
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I have been enjoying for the last three days the discourses imparted here and thus learning the spiritual aspects of education. The idea of education is to bring about the universal validity of human, moral and spiritual values. Self‐reliance and self‐realisation are also part of education, as thought and practiced by the Brahma Kumaris.
Prof. Ramamurthy Goel |
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महिलाओं में बहुआयामी कार्य करने की योग्यता होती है, इसी कारण वह कार्यक्षेत्र एवं परिवार के बीच संतुलन बना पाती हैं। हमें अपनी दिनचर्या में अपने विचारों की जांच करने की आवश्यकता है कि कहीं कोई संकल्प हमें कमजोर तो नहीR बनाते हैं। आज सामंजस्य शक्ति की कमी के कारण परिवार बिखर रहे हैं और दूरियां बढ़ती जा रही है।
श्रीमति रंजना कुमार, पूर्व निर्देशिका, स्टॉक एक्सचेंज |
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An Opportunity to get transformed and thus be a source in itself for further helping in transforming the world while being here at any point of time. Really a fantastic occasion, which boosts our inner self.
Dr. S.S. Dalal |
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अन्ना मलाई विश्व विद्यालय और ब्रह्माकुमारीज विश्व विद्यालय के सहयोग से मूल्य एवं अध्यित्मिक शिक्षा के डिप्लोमा पाठयक्रम की लॉचिग की गई। यह पाठयक्रम 12वी पास विद्यार्थी अपना सकेंगे। हमे गर्व है कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के साथ मिलकर हम बार-बार नये-नये पाठयक्रमों की लॉचिग कर रहे है। इन मामलो में हम काफी भाग्यशाली साबित हुए है। अन्नामलाई विश्वविद्यालय ने ही आध्यात्मिकता का यह पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने का साहस दिखलाया है। मूल्य एवं आध्यात्मिकता के पठन-पाठन से ही संसार में अच्छे शिक्षक और विद्यार्थी तैयार होंगे, हम ऐसा विश्वास करते हैं। एम.बी.ए. का अर्थ है- मास्टर बाबा एटीट्यूड। हम शिवबाबा की शिक्षाओं को संसार में लागू करना चाहते हैं।
डॉ. एस.वी. नागेश्वर राव |
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ब्रह्माकुमारी संस्था की संस्कृति को पूरे विश्व में अपनाया जाए तो नई दुनिया आ सकती है। आज के समय और पुराने समय में जमीन-आसमान का अंतर है। आज की नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति को भूलती जा रही है। इस दिशा में यह संस्था प्राचीन और पुरातन संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने में सराहनीय प्रयास कर रही है।
श्री संजय देवतले |
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यदि नारी चाहे तो पूरे समाज के लिए संजीवनी बूटी बन सकती है। इसके लिए उसे जीवन में आध्यात्मिकता का समावेश करना होगा। नारी तो एक पवित्र ज्योति है जिसके प्रकाश से परिवार, समाज और देश सुख प्राप्त करता है। नारी का जो स्वरूप लक्ष्मी और सीता के रूप में था, वह आज खो गया है। हमें पुनः अपने उस स्वरूप को पहचानने की आवश्यकता है तभी उसे खोया हुआ गौरव व सम्मान प्राप्त होगा। आज पूरे विश्व के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनें महिला सशक्तिकरण का एक अनुपम उदाहरण है।
श्रीमति सपना कपूर, वाइस-प्रेसीडेंट, आदित्य बिरला ग्रुप, हरियाणा |
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ऐसा कोई कार्य नहीं जो नारी नहीं कर सकती है। आज की नारी राष्ट्रपति भी बन गई है। महिलाओं को अत्याचार के खिलाफ आवा॰ज उठानी चाहिए। ब्रह्माकुमारी संस्था मन का ब्यूटी पार्लर है। मुझे यहाँ की एक बात बहुत अच्छी लगी कि यहाँ धर्म, जाति, स्थान इत्यादि का भेदभाव न रखकर सभी को एक परमात्म-परिवार का सदस्य समझा जाता है।
श्री शक्ति सिंह गोहिल |
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गीता में परमात्मा ने कहा हैः जब-जब धर्म का हृस होता है, अधर्म का तांडव बना रहता है तब-तब मैं स्वयं प्रकट होकर पुनः धर्म की स्थापना करूंगा। यह बात कलियुग में परमात्मा ने ब्रह्मा के तन में प्रविष्ट होकर सत्य साबित कर दी है। मनुष्यात्माओं के अंदर सद्भावना का बीज बोने के लिए प्रेम, अहिंसा, सत्यता और ईमानदारी अत्यन्त आवश्यक है। इन गुणों की शिक्षा इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय में दी जा रही है बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों में इस तरह की शिक्षा का अभाव है। संस्था द्वारा मूल्यों की जो शिक्षा दी जा रही है, वह बहुत ही अच्छा कार्य है। इस संस्था का ज्ञान सर्व धर्म आत्माओं के लिए है।
जगद्गुरू शंकराचार्य मठाधीश सच्चिदानंद |
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मैं दुनिया के सभी विद्यार्थी से यह कहना चाहता हूँ कि यदि उन्हें केवल डिग्री या डिप्लोमा चाहिए तो वे किसी भी लौकिक विश्वविद्यालयों से प्राप्त कर सकते हैं परन्तु जीवन के हर पहलू का वास्तविक ज्ञान सिर्फ माउण्ट आबू स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में मिल सकता है।
काशी पीठाधीश श्री राम शरणाचार्य जी |
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महिला और पुरूष परिवार की धुरी के दो पहिये हैं। संतुलन, समानता, समरूचिता और दृढ़ता नारी के विशेष गुण हैं। भारत में प्राचीन काल से ही नारियों का गायन और पूजन होता आ रहा है। जीवनदात्री, प्रकृति स्वरूपा, देवी स्वरूपा व जगत की रक्षा करने वाली नारी ही हैं। नारी के प्रति ाहिंसा भारत की ही नहीं, वरन् पूरे विश्व की समस्या है। ाहिंसामुत्त समाज की स्थापना के लिए नैतिक, मानवीय और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा आवश्यक है। महिला सशत्तिकरण के साथ-साथ पुरूष सशक्तिकरण की भी आवश्यकता है। यह कार्य इस विश्व विद्यालय द्वारा बखूबी किया जा रहा है।
पद्म-विभूषण डॉ. सोनल मानासिंह, विश्व प्रसिद्ध नृत्यांगना |
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परमात्मा की प्राप्ति हेतु मैं कई साधु-महात्माओं के पास गया लेकिन किसी ने भी मुझे परमात्मा से मिलने का सही मार्ग नहीं दिखाया। जब मैं ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों से मिला तो उन्होंने मुझे परमात्मा से मिलने की सत्य राह दिखाई, राजयोग ध्यानाभ्यास सिखाया जिसके कारण मैं अब यह कह सकता हूँ कि मैं प्रतिदिन अमृतवेले (प्रातःकाल) परमात्मा से मिलन मनाता हूँ। मुझे प्रत्येक समय ऐसा दिव्य अनुभव होता है कि जैसे भगवान स्वयं मेरे साथ है। इस संस्था में जो शिक्षा दी जा रही है वह परमात्मा द्वारा दिया गया सत्य ज्ञान है। इसके लिए मैं ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रति कृतज्ञ हूँ।
श्री वी.एम. अराध्या |
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अध्यात्म को समझना सहज है परन्तु सदा आध्यात्मिक बने रहना कठिन है। इस विश्व विद्यालय में आकर मुझे लगा कि मैं एक दिव्य स्थान पर आ गया हूँ। भारत का गायन स्वर्णिम युग के रूप में सदा ही रहा है। हमारे पास हमेशा ही अनेक प्रकार के मूल्य रहे हैं। यहाँ आकर मैं काफी लाभान्वित हुआ हूँ। मैंने बहुत कुछ सीखा है। यह मेरे जीवनभर की पूंजी है। हमें ईश्वर के प्रति कृतज्ञ भाव रखना चाहिए और उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। इसी आधार पर हमारे जीवन में ईश्वरीय मूल्यों का प्रादुर्भाव होगा।
प्रो. वाई. सत्यनारायण |
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“ओम शांति, यह मेरा सौभाग्य है, कि मुझे बहुत समय से ब्रह्माकुमारीज के गीत गाने का अवसर मिला है । इन भाई बहनों की सेवा और लगन से मैं बड़ी प्रभावित रही हूं । मुझे लगता है यह अपना ही परिवार है । इन दिनों में कल्चरल विंग द्वारा निर्मित नए एल्बम के दो गीत बहुत अच्छे बने है । सुंदर शब्दों अच्छे भाव और प्यारी सी धुन वाले यह गीत वाकई बहुत कमाल के हैं । मुझे गाते समय भी बहुत अच्छे अनुभव हुए । एक गीत- सबसे बड़ी कला किसे कहते है, उसके बोल इस प्रकार हैं…. सद्भावना जगाना ,सद्भावना बनाना ,सद्भावना सिखाना सबसे बड़ी कला है। सद्भावना संवारे धरती गगन सितारे सद्भावना में सारे ही विश्व का भला है ।
और दूसरा परम कलाकार के हम हैं कलाकार.. जो कलाकारों को नए समाज की रचना के लिए प्रेरित करते हैं आव्हान करते हैं । ऐसे गीत जो आज के समाज और संसार के लिए विशेषकर कलाकारों के लिए बहुत जरूरी है । मैं सभी श्रोताओं और दर्शकों को कहना चाहूंगी ऐसे गीत सुनें और सुनाएं तथा जीवन में लाएं भी । इस अवसर पर एक बात मैं अवश्य कहूंगी कि बहनों ने कई बार माउंट आबू का निमंत्रण दिया । मैं आशा और उम्मीद करती हूं और चाहती भी हूं कि वह दिन आए जब मैं आबू आऊं और आप सबसे मिलूं भी । मैं नए वर्ष की इन एडवांस आप सभी को बहुत ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाइयां देना चाहती हूं । आप सब ऐसे ही संसार की सेवा करते सबका भला करें । सभी स्वस्थ और सुखी हों….” सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति जी:(ब्रह्माकुमारीज के कला संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित गीतों के एल्बम प्रति शुभकामनाएं….) |
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“ओम शांति । ओम शांति कहते ही मुझे ब्रह्माकुमारी बहनें और सभी अपने भाई तथा आबू की यादें ताजा हो जाती हैं यह मैं स्वयं को बड़ी खुश किस्मत समझती हूं मुझे सैकड़ों गीत गाने का मौका मिला है और जब भी बहनों ने याद किया तो मैंने सहर्ष सेवा स्वीकार की । जाने क्या आप सभी में जादू है । इन दिनों कल्चरल विंग के नए एल्बम ‘कला संस्कृति के स्वर्णिम गीत’ के कुछ गाने बहुत प्रेरणादाई बन गए । जैसे- कितना प्यारा लगता है जीवन का संगीत…।
बहुत सुंदर भाव वाले एवं सुंदर सी धुन में बहुत सुंदर सा गीत बना है सचमुच जीवन हो तो ऐसा । और दूसरा-‘ कला वही जो भला करे, साथ ले सबको चला करे । बड़े प्यारे से गीत लगे । ऐसे-ऐसे गीत कलाकारों सहित समाज और संसार के लिए और खास आज के हालात में बहुत आवश्यक हैं । मैं नव वर्ष की पूर्व बेला पर अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों को दिल की मुबारके और ढेर सारी बधाइयां देना चाहती हूं । सभी ऐसे ही हंसते, गाते, मुस्कुराते रहें । ओम शांति ।” सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका साधना सरगम जी: :(ब्रह्माकुमारीज के कला संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित गीतों के एल्बम प्रति शुभकामनाएं….) |
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“ब्रम्हाकुमारीज़ के कल्चरल विंग द्वारा बनाए गए गीत बहुत सुंदर संदेश देने वाले बने हैं । ये एक ओर जहां आज की परिस्थितियों में कलाकारों में नई आशा, विश्वास, हिम्मत और सकारात्मक सोच का संचार करेंगे तो दूसरी ओर ईश्वर के साथ और सहारे का भी अनुभव कराएंगे । साथ ही साथ ऐसे गीत समाज में मूल्यों के प्रति जागरूकता भी लाएंगे । वास्तव में वर्तमान समय समाज सहित सभी कलाकारों को ऐसे गीतों की बड़ी आवश्यकता है । जैसा कि एक गीत कला का व्यापक रूप लिए बहुत सुंदर बना है जिसके बोल हैं ‘कला वही जो भला करे, साथ ले सबको चला करे.. सबके मन में, हर आंगन में, दिव्य ज्योति बन जला करे …. बहुत सुंदर शब्दों वाले गीतों की बहुत सुंदर धुन भी बनी है । मैं समझता हूं ऐसे गीत आप सब सुने, सुनाएं और इनको अंतर्मन में उतारे भी । ऐसी सुखद प्रयास के लिए मैं ब्रह्माकुमारी के सभी साधकों को, भाई बहनों को और प्रभाग के सदस्यों को हृदय से बधाइयां देना चाहता हूं, सचमुच आप सबका कार्य बहुत सराहनीय है । मैं अपने सभी श्रोताओं और दर्शकों को नए वर्ष की अभी से ही बहुत बधाइयां दे रहा हूं नया साल आप सबके लिए मंगलमय हो और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं, कि आप सभी को स्वस्थ सुखी और आनंद रखे ।
सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक सुरेश वाडकर जी: :(ब्रह्माकुमारीज के कला संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित गीतों के एल्बम प्रति शुभकामनाएं….) |
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